Raghopur: वैशाली जिले के राघोपुर में 13 मासूम बच्चों की मौत के बाद आयोजित दशकर्म कार्यक्रम के दौरान हिंसक झड़प का मामला सामने आया है। भगतान टोला में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि कथित तौर पर लाठी-डंडे चलने लगे। इस घटना में जदयू के प्रदेश सचिव अजीत यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर में चोट आई है और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घटना के समय जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी गांव में मौजूद थे। मारपीट के बाद इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था संभाली। वहीं, घटना की सूचना के बाद तेजस्वी यादव का प्रस्तावित दौरा भी रद्द होने की खबर सामने आई।
Raghopur: राघोपुर में आखिर क्यों हुई हिंसक झड़प?
यह पूरा मामला वैशाली जिले के राघोपुर (Raghopur) विधानसभा क्षेत्र की रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला का है। यहां 13 बच्चों की मौत के बाद उनके परिजनों और ग्रामीणों की मौजूदगी में दशकर्म कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में शामिल होने और शोकाकुल परिवारों से मुलाकात करने के लिए प्रशांत किशोर गांव पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इसी दौरान स्थानीय लोगों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई।
बताया जा रहा है कि विवाद एक स्थानीय व्यक्ति और जदयू नेता के बीच हुआ था। देखते ही देखते बहस ने हिंसक रूप ले लिया और दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई। इस दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे जदयू प्रदेश सचिव अजीत यादव को चोट लगने की बात सामने आई है। हालांकि, विवाद की असली वजह और मारपीट में शामिल लोगों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगी।
अजीत यादव के सिर में आई गंभीर चोट
मारपीट के दौरान जदयू प्रदेश सचिव अजीत यादव घायल हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके सिर में गंभीर चोट आई, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। बच्चों की मौत से पहले ही दुख में डूबे परिवारों और (Raghopur) ग्रामीणों के बीच इस घटना ने तनाव और बढ़ा दिया। फिलहाल, इस मामले में किस पक्ष की क्या भूमिका रही, यह जांच का विषय है। पुलिस की ओर से घटना में शामिल लोगों की पहचान करने और शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है।
प्रशांत किशोर के सामने हुई घटना, कुछ देर बाद लौटे
दशकर्म कार्यक्रम के दौरान प्रशांत किशोर पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दे रहे थे। इसी बीच विवाद बढ़ने और मारपीट होने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति बिगड़ने के बाद प्रशांत किशोर लगभग 10 मिनट के भीतर अपने काफिले के साथ गांव से निकल गए। उनके साथ मौजूद समर्थक भी वहां से रवाना हो गए। घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी इसकी चर्चा होने लगी है। हालांकि, झड़प के लिए किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराने से पहले पुलिस जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।
तेजस्वी यादव का दौरा क्यों हुआ रद्द?
राघोपुर (Raghopur) विधानसभा क्षेत्र के विधायक और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के भी पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचने की चर्चा थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें प्रशांत किशोर के पहुंचने के करीब एक घंटे बाद गांव आना था। लेकिन कार्यक्रम स्थल पर झड़प और तनाव की स्थिति उत्पन्न होने के बाद उनका प्रस्तावित दौरा रद्द होने की खबर सामने आई। गौरतलब है कि राघोपुर में 13 बच्चों की मौत के बाद स्थानीय लोगों के बीच पहले से ही दुख और नाराजगी का माहौल है। ऐसे में घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
13 अक्टूबर को नाव हादसे में गई थी 13 बच्चों की जान
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि 13 अक्टूबर 2026 की रात हुए दर्दनाक नाव हादसे से जुड़ी है। वैशाली जिले के राघोपुर (Raghopur) थाना क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद गांव के भगतान टोला के पास गंगा की सोती में एक नाव दुर्घटनाग्रस्त होकर डूब गई थी। इस हादसे में 13 बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि छह लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई थी। मृत बच्चों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और घटना ने नावों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
प्रशासन ने हादसे की जांच के लिए समिति गठित की थी। बाद में जांच रिपोर्ट के आधार पर नाविक और नाव मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करने की खबर सामने आई। नाव के निबंधन, सुरक्षा मानकों, यात्रियों की संख्या और जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता जैसे पहलुओं की जांच की बात कही गई है।
गांव में पुलिस तैनात, जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
दशकर्म कार्यक्रम के दौरान हुई मारपीट के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों के सामने अब घटना की वजह का पता लगाने और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने की चुनौती है। पुलिस के अनुसार, शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, मामले में सामने आए आरोपों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की जांच के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
राघोपुर (Raghopur) की यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब पूरा इलाका 13 बच्चों की मौत के सदमे से गुजर रहा है। ऐसे संवेदनशील मौके पर हिंसक झड़प ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
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