Sonepur Mela 2025: चुनावी आचार संहिता के बीच भी बिहार का गौरव, विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला 2025 का आज शानदार आगाज हुआ। गंगा और गंडक के संगम पर लगने वाला यह ऐतिहासिक मेला हर साल देश-विदेश से लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। शनिवार को सारण रेंज के कमिश्नर राजीव रौशन ने दीप प्रज्वलित कर मेले का औपचारिक उद्घाटन किया। इस मौके पर डीआईजी नीलेश कुमार, डीएम अमन समीर और एसपी कुमार आशीष भी मौजूद रहे।
Sonepur Mela 2025: परंपरा और संस्कृति का प्रतीक
उद्घाटन समारोह में बोलते हुए कमिश्नर राजीव रौशन ने कहा, “सोनपुर मेला न केवल बिहार बल्कि पूरे देश की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। इस मेले का गौरवशाली इतिहास रहा है और यह हमारी धरोहर है, जिसे हमें सहेजकर रखना होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि गंगा-गंडक के संगम पर लगने वाला यह मेला धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। सदियों से यह मेला व्यापार, लोककला और अध्यात्म का संगम माना जाता रहा है।
एक महीने तक चलेगा मेला
जानकारी के अनुसार, सोनपुर मेला 2025 (Sonepur Mela 2025) का आयोजन एक महीने तक किया जाएगा। इस दौरान मुख्य मंच से रोजाना विभिन्न कलाकारों द्वारा लोक नृत्य, नाटक, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा, राज्य पर्यटन विभाग, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग और अन्य सरकारी संस्थाओं के कई स्टॉल भी लगाए गए हैं, जो आगंतुकों को जानकारी और सेवाएं प्रदान करेंगे।
घोड़ा बाजार बना आकर्षण का केंद्र
हर साल की तरह इस बार भी मेले का सबसे बड़ा आकर्षण बना है — घोड़ा बाजार (Horse Fair)। यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और झारखंड समेत कई राज्यों से व्यापारी पहुंचे हैं। एक से बढ़कर एक नस्ल के घोड़े देखने को मिल रहे हैं, जिनकी कीमत लाखों रुपये तक है। पर्यटक और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में इन घोड़ों को देखने और खरीदने के लिए उमड़ रहे हैं। सोनपुर मेला को एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला कहा जाता है, और यह परंपरा आज भी कायम है।
पर्यटन को बढ़ावा
इस बार प्रशासन ने पर्यटकों के लिए सुरक्षा, आवास और यातायात की विशेष व्यवस्था की है। डीएम अमन समीर ने बताया कि मेले में लाखों की भीड़ आने की संभावना है, इसलिए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती, सीसीटीवी कैमरे, और कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई है। सारण पुलिस अधीक्षक कुमार आशीष ने बताया कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सोनपुर मेले का इतिहास
सोनपुर मेला सदियों पुराना है और माना जाता है कि इसकी शुरुआत चंद्रगुप्त मौर्य के समय हुई थी। यह मेला मूल रूप से हरिहर क्षेत्र में आयोजित होता है, जहाँ भगवान हरि (विष्णु) और हर (शिव) की पूजा की जाती है। धार्मिक रूप से भी यह मेला बेहद पवित्र माना जाता है और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ हजारों लोग स्नान करते हैं।
सोनपुर मेला 2025 (Sonepur Mela 2025) न सिर्फ व्यापार और मनोरंजन का केंद्र है, बल्कि यह बिहार की सांस्कृतिक पहचान का उत्सव भी है। चुनावी माहौल के बीच भी इस मेले का जोश और पारंपरिक रौनक बरकरार है। लोगों में उत्साह है, व्यापारी खुश हैं और प्रशासन पूरी तैयारी के साथ आयोजन में जुटा हुआ है। “सोनपुर मेला — बिहार की संस्कृति, परंपरा और समृद्धि का जीवंत प्रतीक है।”








