NEET Student Murder Case: बिहार में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के दुष्कर्म और हत्या के मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है। बिहार सरकार द्वारा इस केस को CBI को सौंपने के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक कड़ा बयान जारी करते हुए बिहार की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाए हैं।
NEET Student Murder Case: तेजस्वी यादव ने अपने ट्वीट में लिखा:
NEET छात्रा के दुष्कर्म और हत्या का उद्भेदन करने की बजाय बिहार सरकार ने केस को CBI को सौंपने का निर्णय लेकर फिर साबित कर दिया कि बिहार का प्रशासनिक ढाँचा भ्रष्ट, अयोग्य, अदक्ष और अनप्रोफेशनल है जो एक बलात्कार और हत्या के केस को भी नहीं सुलझा सकता। पुलिस से अधिक यह बड़बोली एनडीए सरकार के करप्ट और कंप्रोमाइज़्ड तंत्र की विफलता है जिनके कर्ता-धर्ता मंत्री-मुख्यमंत्री दिन रात आकाश-पाताल से अपराधियों को पकड़ने की डींगे हांकते है।
नवरुणा कांड जैसे अनेक मामलों में सीबीआई 12-13 वर्षों से आरोपियों को नहीं पकड़ पाई तथा जाँच भी बंद कर दी। यही इस मामले में होना है। कहाँ है चुनावों में जंगलराज-जंगलराज चिल्लाने वाले? बिहार की ध्वस्त और भ्रष्ट विधि व्यवस्था की जवाबदेही कौन लेगा? क्या फिर सरकार द्वारा हेडलाइन मैनेजमेंट के ज़रिए ध्यान भटकाने की कोशिशें होगी?
सरकार के फैसले पर विपक्ष का हमला
तेजस्वी यादव के इस ट्वीट के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। उन्होंने सीधे तौर पर बिहार सरकार और NDA शासन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि CBI जांच का फैसला मामले की सच्चाई सामने लाने के बजाय जिम्मेदारी से बचने का तरीका है। साथ ही उन्होंने पुराने मामलों का हवाला देते हुए CBI की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।
नेता प्रतिपक्ष ने अपने बयान में बिहार की विधि व्यवस्था को “ध्वस्त और भ्रष्ट” करार देते हुए यह भी पूछा है कि ऐसे मामलों की जवाबदेही कौन लेगा। ट्वीट में “जंगलराज” के मुद्दे को उठाकर उन्होंने चुनावी भाषणों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर की ओर इशारा किया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
तेजस्वी यादव के इस ट्वीट के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी की संभावना बढ़ गई है। एक ओर जहां विपक्ष इस फैसले को प्रशासनिक विफलता बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से अभी इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। NEET छात्रा का यह मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल बनकर उभरा है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।








