Siwan News: सीवान में गुरु-शिष्य परंपरा पर गहरा दाग, छात्रा से छेड़खानी के आरोप में प्रधानाध्यापक का निकाला गया जुलूस

सीवान में गुरु-शिष्य परंपरा को शर्मसार करने वाली घटना, छात्रा से छेड़खानी के आरोप में सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक का निकाला गया जुलूस, पुलिस जांच में जुटी।

On: Saturday, February 7, 2026 4:27 PM
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Siwan News: जिस गुरु को बच्चे अपना मार्गदर्शक और संरक्षक मानते हैं, जब वही भरोसे को तोड़ दे, तो सिर्फ एक परिवार नहीं बल्कि पूरा समाज शर्मसार होता है। बिहार के सीवान जिले से सामने आई एक घटना ने न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा को भी कठघरे में ला खड़ा किया है। सरकारी स्कूल के एक प्रधानाध्यापक पर छात्रा से छेड़खानी का आरोप लगा है, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी को सार्वजनिक रूप से अपमानित करते हुए पूरे गांव में जुलूस निकाला।

Siwan News: कन्हौली गांव की घटना, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया

यह सनसनीखेज मामला सीवान जिले के बसंतपुर थाना क्षेत्र स्थित कन्हौली गांव का है। यहां प्राथमिक विद्यालय हरियामा के प्रधानाध्यापक वीरेंद्र साह पर एक नाबालिग छात्रा के साथ छेड़खानी का गंभीर आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि प्रधानाध्यापक अपने घर पर बच्चों को निजी तौर पर ट्यूशन पढ़ाते थे। शनिवार को कुछ अभिभावक अचानक उनके घर पहुंचे, जहां कथित तौर पर उन्होंने शिक्षक को एक छात्रा के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा। इस दृश्य को देखकर अभिभावकों के होश उड़ गए। देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में फैल गई और मौके पर भारी संख्या में लोग जुट गए।

गुस्से में बेकाबू हुई भीड़, कानून को लिया हाथ में

घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आरोप है कि उत्तेजित भीड़ ने आरोपी शिक्षक के कपड़े उतरवा दिए, चेहरे पर कालिख पोत दी और जूते-चप्पलों की माला पहनाकर पूरे गांव में घुमाया। यह जुलूस कन्हौली मोड़ तक निकाला गया, जहां सैकड़ों लोग तमाशबीन बने रहे। भीड़ के गुस्से का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दौरान आरोपी के साथ मारपीट और बदसलूकी भी की गई। कुछ समय के लिए पूरे इलाके में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया।

पुलिस का हस्तक्षेप, आरोपी को किया गया रेस्क्यू

स्थिति बिगड़ते देख किसी ने पुलिस को सूचना दी। बसंतपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आरोपी शिक्षक को भीड़ से सुरक्षित बाहर निकाला। थाना प्रभारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया है और आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने पीड़ित छात्रा, उसके परिजनों और आरोपी पक्ष के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले की जांच संवेदनशीलता के साथ की जा रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में डर और आक्रोश का माहौल है। अभिभावक सवाल उठा रहे हैं कि जिन शिक्षकों पर बच्चों के भविष्य और सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, अगर वही इस तरह के आरोपों में घिर जाएं, तो बच्चों को सुरक्षित कैसे रखा जाए? स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्यूशन और निजी पढ़ाई के नाम पर बिना किसी निगरानी के बच्चों को शिक्षकों के घर भेजना अब खतरे से खाली नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस पर सख्त नियम बनाए जाएं।

कानून हाथ में लेना सही या गलत?

जहां एक ओर आरोपी पर गंभीर आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों द्वारा कानून हाथ में लेना भी चिंता का विषय है। पुलिस और प्रशासन ने साफ कहा है कि दोषी चाहे कोई भी हो, सजा कानून के तहत ही दी जाएगी। भीड़ द्वारा किसी को सजा देना न सिर्फ गलत है, बल्कि इससे कानून-व्यवस्था भी बिगड़ती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे संयम बरतें और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखें।

शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र और समाज की जिम्मेदारी को दर्शाता है। शिक्षक समाज का आईना होते हैं। ऐसे मामलों से न सिर्फ बच्चों का मनोबल टूटता है, बल्कि माता-पिता का भरोसा भी डगमगा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में काउंसलिंग, निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।

सीवान की यह घटना एक कड़वी सच्चाई को सामने लाती है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो आरोपी शिक्षक को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। साथ ही समाज को भी यह समझना होगा कि गुस्से में कानून हाथ में लेना समाधान नहीं है। बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा की पवित्रता और कानून का सम्मान—इन तीनों के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

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