Bhiwadi Factory Accident: मोतिहारी के 7 घरों में पसरा मातम, अवैध पटाखा यूनिट की आग ने छीन ली जिंदगी

राजस्थान के भिवाड़ी में अवैध फैक्ट्री में लगी भीषण आग में मोतिहारी के 7 मजदूरों की दर्दनाक मौत। जानिए हादसे की पूरी कहानी, जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट।

On: Monday, February 16, 2026 5:21 PM
Bhiwadi Factory Accident

Bhiwadi Factory Accident: रोजगार की तलाश में घर से दूर निकले मजदूर अक्सर अपने परिवार के बेहतर भविष्य के सपने लेकर शहरों का रुख करते हैं। लेकिन राजस्थान के भिवाड़ी में हुआ ताजा हादसा उन सपनों को राख में बदल गया। सोमवार को अलवर जिले के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में लगी भीषण आग ने बिहार के मोतिहारी के सात परिवारों के चिराग हमेशा के लिए बुझा दिए। यह सिर्फ एक फैक्ट्री हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही, अवैध कारोबार और मजदूरों की मजबूरी की दर्दनाक कहानी बनकर सामने आया है।

Bhiwadi Factory Accident: अवैध फैक्ट्री में लगी आग ने ली 7 मजदूरों की जान

जानकारी के मुताबिक जिस यूनिट में आग लगी थी, वह सरकारी रिकॉर्ड में एक वस्त्र (गारमेंट) फैक्ट्री के रूप में दर्ज थी। लेकिन शुरुआती जांच में खुलासा हुआ कि अंदर अवैध रूप से छोटे पटाखे बनाए जा रहे थे। विस्फोटक सामग्री के बीच काम कर रहे मजदूरों को सुरक्षा के नाम पर कुछ भी उपलब्ध नहीं कराया गया था।

सोमवार को अचानक फैक्ट्री के अंदर जोरदार धमाका हुआ, (Bhiwadi Factory Accident) जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। देखते ही देखते पूरा परिसर आग की लपटों में घिर गया। अंदर काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। आग इतनी भयानक थी कि बचाव दल को भी अंदर पहुंचने में काफी समय लगा। जब आग पर काबू पाया गया, तब जो दृश्य सामने आया उसने सभी को झकझोर दिया। अंदर से केवल जले हुए अवशेष और कंकाल मिले, जिन्हें पहचानना लगभग असंभव था।

मोतिहारी से रोजी-रोटी कमाने गए थे मजदूर

जिला प्रशासन के अनुसार (Bhiwadi Factory Accident) हादसे में जान गंवाने वाले सभी श्रमिक बिहार के मोतिहारी जिले के रहने वाले थे। बेहतर कमाई की उम्मीद में वे राजस्थान पहुंचे थे। परिवारों को यह भी नहीं पता था कि जिस फैक्ट्री में उनके अपने काम कर रहे हैं, वहां अवैध और खतरनाक गतिविधियां चल रही हैं। प्रशासन ने अब तक पांच मृतकों की पहचान कर ली है और परिजनों को सूचना दी जा रही है। गांवों में जैसे ही खबर पहुंची, मातम का माहौल छा गया। कई परिवारों के सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि मृतक ही घर के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे।

यह घटना (Bhiwadi Factory Accident) एक बार फिर बताती है कि देश के लाखों प्रवासी मजदूर जोखिम भरे काम करने को मजबूर हैं, जहां सुरक्षा नियम अक्सर कागजों तक सीमित रह जाते हैं।

नियमों की अनदेखी और कानूनी खामियों का फायदा

जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री अधिनियम के दायरे में भी नहीं आती थी। नियमों के मुताबिक 20 या उससे अधिक श्रमिक होने पर सख्त सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होता है, लेकिन रिकॉर्ड में यहां 10 से भी कम मजदूर दिखाए गए थे। इसी कानूनी loophole का फायदा उठाकर फैक्ट्री संचालक बिना फायर एनओसी और बिना सुरक्षा इंतजाम के विस्फोटक सामग्री का काम करवा रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में इस तरह की कई यूनिट्स फर्जी पंजीकरण के सहारे चल रही हैं, जहां निरीक्षण की कमी बड़े हादसों को जन्म देती है।

पोटलियों में समेटने पड़े शवों के अवशेष

हादसा (Bhiwadi Factory Accident) इतना भयावह था कि मृतकों के शव पूरी तरह जल चुके थे। बचाव दल को अवशेषों को पोटलियों में इकट्ठा कर मुर्दाघर भेजना पड़ा। पहचान के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम ने नमूने जुटाए हैं, ताकि डीएनए जांच के जरिए मृतकों की पुष्टि की जा सके। यह दृश्य वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और बचावकर्मियों के लिए भी बेहद भावुक कर देने वाला था। कई अधिकारियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने करियर में इतना दर्दनाक हादसा कम ही देखा है।

फैक्ट्री संचालक फरार, कार्रवाई की तैयारी

घटना (Bhiwadi Factory Accident) के बाद फैक्ट्री संचालक मौके से फरार बताया जा रहा है। प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए औद्योगिक विकास संस्था की ओर से एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस फैक्ट्री प्रबंधक से पूछताछ की तैयारी में है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या मुआवजा उन परिवारों के दर्द को कम कर पाएगा, जिन्होंने अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए खो दिया।

औद्योगिक सुरक्षा पर फिर खड़े हुए बड़े सवाल

भिवाड़ी हादसा (Bhiwadi Factory Accident) कोई पहला मामला नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध फैक्ट्रियों में आग और विस्फोट की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। हर बार जांच और कार्रवाई की बात होती है, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर वैसे ही हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल नियम बनाना काफी नहीं, बल्कि नियमित निरीक्षण और कड़ी जवाबदेही जरूरी है। जब तक अवैध यूनिट्स पर सख्ती नहीं होगी, ऐसे हादसे दोहराए जाते रहेंगे। यह हादसा सिर्फ सात मजदूरों की मौत नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जहां गरीब मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।

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