Bihar Liquor Ban: पिछले 9 सालों से बिहार में शराबबंदी कानून (Bihar Liquor Ban) लागू है, जहां एक बार फिर इस कानून ने एक अलग चर्चा शुरू कर दी है. बिहार में शराबबंदी को पूर्ण रूप से खत्म करने को लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ अब एनडीए के सहयोगी दलों ने भी खुलकर समीक्षा की मांग शुरू कर दी है. अभी तक नीतीश कुमार जिस शराबबंदी कानून को लेकर अपनी पीठ थपथपाते नजर आते थे, अब उसे लेकर सियासत शुरू हो चुकी है.
Bihar Liquor Ban: बिहार से खत्म होगी शराबबंदी?
अभी तक केवल गठबंधन के नेता जीतन राम मांझी को ही मुखर होकर शराब बंदी (Bihar Liquor Ban) पर चर्चा करते हुए देखा गया, लेकिन अब उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम ने भी इसमें सुर से सुर मिलाना शुरू कर दिया है. आरएलएम विधायक माधव आनंद ने सीएम नीतीश कुमार से आग्रह किया है कि अब वक्त आ गया है जब शराबबंदी कानून के व्यापक पैमाने पर विस्तृत समीक्षा होनी चाहिए. उनका कहना है कि हर कानून का आकलन जरूरी है जिससे यह पता चले कि राज्य को क्या मिला है और क्या राज्य ने खोया है.
9 साल की शराबबंदी पर सरकार के आंकड़े
शराबबंदी को लेकर सरकार का कहना है कि 2016 से अब तक 10 लाख केस दर्ज किए गए हैं और 16 लाख लोगों की गिरफ्तारी हुई है. वही चार करोड़ लीटर से ज्यादा शराब जब्ति और 1.6 लाख वाहनों को जप्त किया गया है. बिहार सरकार के मंत्री ने यह स्पष्ट किया है कि सरकार संवेदनशील है और पुलिस व्यवस्था के साथ मिलकर ड्रग्स और शराब के खिलाफ अभियान जारी रखेंगे.
हालांकि शराब बंदी के बाद महिला वोट बैंक नीतीश कुमार के साथ मजबूती से खड़ा रहा है, क्योंकि इस कानून को लागू करने के बाद घरेलू हिंसा के मामलों में काफी ज्यादा गिरावट नजर आई है लेकिन इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि शराब बंदी के बाद जहरीली शराब से होने वाली मौत की घटनाओं ने भी सरकार को कटघरे में खड़े कर दिया है.
Read Also: Bihar Weather Today: कभी धूप कभी ठंड… बिहार में बदलते मौसम ने लोगों की बढा़ई चिंता








