Aurangabad: हाइवा पलटने से सो रही दो बहनों की मौत, गांव में पसरा मातम

अंबा थाना क्षेत्र में सड़क धंसने से हाइवा झोपड़ी पर पलटा, मलबे में दबकर दो मासूम बहनों की दर्दनाक मौत। जानिए पूरा हादसा, प्रशासनिक कार्रवाई और ग्रामीणों की मांग...

On: Thursday, February 26, 2026 1:28 PM
Aurangabad

Aurangabad: कभी-कभी एक पल की लापरवाही या व्यवस्था की छोटी सी चूक पूरे परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल देती है। ज़िले के अंबा थाना क्षेत्र से सामने आई यह दर्दनाक घटना भी कुछ ऐसी ही है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। सड़क निर्माण के दौरान अचानक सड़क धंसने से एक तेज़ रफ्तार हाइवा अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बनी झोपड़ी पर पलट गया। इस हादसे में दो मासूम बहनें मलबे में दब गईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और गांव का माहौल अब भी गमगीन है।

यह हादसा अंबा थाना क्षेत्र के गंगतुआ गांव के पास भटकुर मोड़ के समीप हुआ, जहां सड़क निर्माण का काम चल रहा था। हादसे ने न सिर्फ एक परिवार की खुशियां छीन लीं बल्कि सड़क निर्माण की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Aurangabad: कैसे हुआ दर्दनाक हादसा — सोते-सोते चली गई मासूमों की जान

मिली जानकारी के अनुसार, रामपुर गांव निवासी उदय यादव ने अपने पशुओं और खेती से जुड़े सामान रखने के लिए सड़क किनारे एक झोपड़ी बना रखी थी। यही झोपड़ी उस परिवार के लिए अस्थायी आशियाना भी थी। घटना के वक्त उनकी दो बेटियां — प्रियंका उर्फ रिद्धि (6 वर्ष) और प्रीति उर्फ सिद्धि (3 वर्ष) — झोपड़ी के अंदर गहरी नींद में सो रही थीं। ग्रामीणों के अनुसार, डुमरी से भटकुर मोड़ तक सड़क निर्माण का कार्य जारी था और निर्माण सामग्री लेकर एक हाइवा वहां से गुजर रहा था। अचानक सड़क का एक हिस्सा धंस गया, जिससे भारी वाहन का संतुलन बिगड़ गया। चालक वाहन को संभाल नहीं सका और हाइवा सीधे झोपड़ी पर पलट गया।

कुछ ही सेकंड में मिट्टी और बांस से बना कच्चा घर मलबे में तब्दील हो गया। किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला। भारी वाहन के नीचे दबने से दोनों मासूम बहनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसे के तुरंत बाद चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। हाइवा पलटते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग चीख-पुकार सुनकर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।

ग्रामीणों की कोशिशें और प्रशासनिक कार्रवाई

हादसे के बाद ग्रामीणों ने अपने स्तर पर बच्चियों को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन कई टन वज़नी हाइवा को हटाना उनके बस की बात नहीं थी। करीब आधे घंटे बाद निर्माण स्थल पर मौजूद जेसीबी मशीन की मदद से वाहन को हटाया गया। जब तक मलबा हटाया गया, तब तक दोनों बच्चियों की सांसें थम चुकी थीं।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया, जहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। पुलिस ने हाइवा को जब्त कर लिया है और चालक की तलाश शुरू कर दी गई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि हादसे की जांच की जा रही है और सड़क निर्माण से जुड़े सुरक्षा मानकों की भी समीक्षा होगी। साथ ही पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।

सड़क निर्माण और सुरक्षा पर उठे सवाल

यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही की ओर भी इशारा करती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा था। भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी थी, लेकिन आसपास रहने वाले लोगों के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माणाधीन सड़कों पर मिट्टी कमजोर होने के कारण धंसने का खतरा बना रहता है। ऐसे में भारी वाहनों की गति नियंत्रित रखना और आसपास रहने वालों को पहले से सचेत करना बेहद जरूरी होता है। अगर समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाते, तो शायद यह हादसा टल सकता था।

गांव में पसरा मातम, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

हादसे के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। बच्चियों की मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन मासूमों की किलकारियों से घर गूंजता था, आज वहां सिर्फ सिसकियां सुनाई दे रही हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक सहायता से परिवार की मदद तो हो सकती है, लेकिन मासूम जिंदगियों की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। यह घटना पूरे इलाके के लिए एक दर्दनाक सबक बन गई है।

ऐसे हादसे क्यों दोहराए जाते हैं? (बैकग्राउंड और संदर्भ)

देश के कई हिस्सों में सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी अक्सर सामने आती रही है। भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही, कमजोर सड़क संरचना और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को नजरअंदाज करना ऐसे हादसों की बड़ी वजह बनता है। ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग सड़क किनारे अस्थायी झोपड़ियां बना लेते हैं, क्योंकि खेती और पशुपालन का काम वहीं से जुड़ा होता है। लेकिन निर्माण कार्य के दौरान प्रशासन और ठेकेदारों की जिम्मेदारी बनती है कि आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखा जाए।

यह हादसा एक बार फिर बताता है कि विकास कार्यों के साथ सुरक्षा व्यवस्था उतनी ही जरूरी है, जितनी सड़क का निर्माण।

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