Bihar Election 2025: 22 गांवों ने किया वोट बहिष्कार, “सड़क नहीं तो वोट नहीं” की गूंज से हिला पश्चिम चंपारण

Bihar Election 2025: के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान में जहां पूरे प्रदेश में वोटिंग को लेकर जबरदस्त उत्साह ... Read more

On: Tuesday, November 11, 2025 2:44 PM
Bihar Election 2025

Bihar Election 2025: के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान में जहां पूरे प्रदेश में वोटिंग को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है, वहीं पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर विधानसभा क्षेत्र से एक चौंकाने वाली खबर आई है। यहां 22 गांवों के ग्रामीणों ने वोट बहिष्कार का ऐलान कर दिया। इन गांवों के 15 हजार से अधिक मतदाताओं में से सुबह 11 बजे तक किसी ने भी वोट नहीं डाला।

Bihar Election 2025: “सड़क नहीं तो वोट नहीं” – गांव-गांव में लगे पोस्टर

रामनगर प्रखंड के दोन पंचायत में ग्रामीणों ने मतदान से पहले ही अपने निर्णय की घोषणा कर दी थी। गांवों की दीवारों और पेड़ों पर पोस्टर लगाए गए जिन पर लिखा था।
 “सड़क नहीं तो वोट नहीं”
 “बिजली नहीं तो वोट नहीं”
 “शिक्षा नहीं तो वोट नहीं”
 “स्वास्थ्य सुविधा नहीं तो वोट नहीं”
 “नेटवर्क नहीं तो वोट नहीं”

पोस्टरों पर “दोनवासी की यही पुकार, अबकी बार वोट बहिष्कार” जैसे नारे भी दर्ज हैं। यह नारा अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

थारू समाज की बड़ी आबादी, सालों से विकास की प्रतीक्षा

जानकारी के अनुसार, इन गांवों में थारू समुदाय की आबादी अधिक है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 78 साल बाद भी सड़क, बिजली, पुल-पुलिया और नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं। हर बार नेता आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही क्षेत्र को भूल जाते हैं।

ग्रामीणों ने साफ कहा “इस बार हमने ठान लिया है, विकास नहीं तो वोट नहीं!”

मतदान से पहले बीएलओ द्वारा मतदाता पर्चियां बांटी गई थीं, जिन्हें ग्रामीणों ने वापस लौटा दिया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें ग्रामीण सामूहिक रूप से मतदान का बहिष्कार करते दिख रहे हैं। वीडियो में ग्रामीणों की नाराज़गी साफ झलकती है।

किन गांवों ने किया वोट बहिष्कार?

रामनगर प्रखंड के करीब 22 गांवों में मतदान पूरी तरह ठप रहा। इनमें प्रमुख गांव हैं —

  • गर्दी दोन
  • नौरंगिया दोन
  • खैरहनी दोन
  • लक्ष्मीपुर दोन
  • गोबरहिया दोन
  • बेतहानी दोन
    इन्हीं गांवों में 15 हजार से ज्यादा मतदाता हैं, लेकिन सुबह 11 बजे तक एक भी वोट नहीं पड़ा।

प्रशासन ने की अपील, नहीं माने ग्रामीण

वोट बहिष्कार की खबर मिलते ही बीडीओ, सीओ और जीविका प्रखंड समन्वयक मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में बगहा के एसपी भी वहां पहुंचे और संवाद करने की कोशिश की, मगर स्थिति जस की तस बनी रही।

अररिया और सीतामढ़ी में भी दिखा बहिष्कार का असर

पश्चिम चंपारण के अलावा, अररिया और सीतामढ़ी जिलों में भी मतदान बहिष्कार के मामले सामने आए हैं। अररिया के किसमत खाबसपुर पंचायत के सगुना बूथ संख्या 33 पर पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने वोट नहीं डाला। सुबह के चार घंटे बीतने के बाद भी केवल 12-15 लोगों ने मतदान किया। सीतामढ़ी जिले के बथनाहा विधानसभा के सोनवा गांव (बूथ संख्या 350, 351, 352) पर भी मतदान बहिष्कार हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने निर्दोष लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए हैं, जिसके विरोध में उन्होंने वोट न देने का फैसला लिया।

लोकतंत्र के उत्सव में एक गंभीर संदेश

जहां एक ओर बिहार के दूसरे चरण में 31.38% से अधिक मतदान हो चुका है और वोटरों में भारी उत्साह है, वहीं इन गांवों का वोट बहिष्कार लोकतंत्र के लिए गंभीर संदेश है। यह साफ दर्शाता है कि ग्रामीण अब केवल वादों पर नहीं, विकास की गारंटी पर विश्वास करना चाहते हैं।

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