Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण में मंगलवार को राज्य के 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान जारी है। दोपहर 1 बजे तक 47.62% वोटिंग दर्ज की गई, जो पहले चरण की तुलना में लगभग 6% अधिक है। इस चरण में कुल 1302 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला करीब 3.70 करोड़ मतदाता करेंगे।
Bihar Election 2025: सबसे अधिक मतदान किशनगंज में
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक मतदान किशनगंज जिले में 51.86% दर्ज किया गया है। यह जिला मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल इलाका है। वहीं, अन्य जिलों जैसे अररिया, नवादा और बेतिया से हिंसा, विरोध और अनियमितताओं की घटनाएं भी सामने आई हैं।
अररिया में भिड़े भाजपा-कांग्रेस समर्थक
अररिया जिले के एक मतदान केंद्र पर भाजपा और कांग्रेस समर्थकों के बीच झड़प हो गई। कांग्रेस समर्थकों ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें पटक-पटक कर मारने की धमकी दी। हालांकि, मौके पर पहुंची पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को अलग कर स्थिति को नियंत्रित किया। प्रशासन की ओर से बताया गया कि मतदान दोबारा शुरू करवा दिया गया है और माहौल अब नियंत्रण में है।
बेतिया में रिश्वतखोरी का मामला
बेतिया जिले में चुनाव के दौरान दो राजद समर्थकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, जब वे कथित तौर पर पैसा देकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों से पूछताछ जारी है और जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर बिहार चुनाव में पैसे के दुरुपयोग और मतदाता प्रलोभन के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
नवादा में भाजपा प्रत्याशी को ग्रामीणों ने खदेड़ा
दूसरी ओर, नवादा जिले के हिसुआ विधानसभा क्षेत्र में उस समय हंगामा हो गया जब भाजपा उम्मीदवार अनिल सिंह प्रचार के लिए धरिया गांव पहुंचे। ग्रामीणों ने “विकास नहीं तो वोट नहीं” के नारे लगाते हुए उन्हें गांव से खदेड़ दिया। स्थानीय लोगों का आरोप था कि विधायक रहते हुए उन्होंने एक भी विकास कार्य नहीं कराया — न सड़क बनी, न पानी की समस्या दूर हुई, न रोजगार के अवसर बढ़े।
गांव वालों का कहना था कि “हर चुनाव में वादे करते हैं, फिर पांच साल तक दिखते नहीं हैं। अब चुनाव के वक्त आकर झूठे वादे करने का कोई मतलब नहीं है।” यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है और चुनावी माहौल में भाजपा के लिए नकारात्मक प्रभाव छोड़ सकती है।
सुरक्षा व्यवस्था और मतदान की स्थिति
चुनाव आयोग के अनुसार, राज्यभर में 45,399 मतदान केंद्र (बूथ) बनाए गए हैं। इनमें से 4,109 बूथों को संवेदनशील घोषित किया गया है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ताकि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। कई जिलों में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। चुनाव आयोग ने बताया कि इस बार भी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर वोटिंग में हिस्सा लिया है। जहां सामान्य क्षेत्रों में शाम 6 बजे तक मतदान हो रहा है, वहीं संवेदनशील इलाकों में 4 से 5 बजे तक ही मतदान कराया जा रहा है।
14 नवंबर को मतगणना
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतगणना 14 नवंबर 2025 को होगी। इसी दिन यह तय होगा कि बिहार की सत्ता की बागडोर किसके हाथ जाएगी — एनडीए या महागठबंधन। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार जनता स्थानीय मुद्दों पर मतदान कर रही है, खासकर रोजगार, सड़कों, बिजली और भ्रष्टाचार जैसे विषयों पर।
मतदाताओं का मूड: “काम पर वोट, बातों पर नहीं”
हिसुआ जैसे इलाकों में जहां उम्मीदवारों को ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ उम्मीदवारों को जनता ने खुले दिल से स्वागत भी किया है। यह स्पष्ट संकेत है कि बिहार का मतदाता अब बदलाव चाहता है। लोगों का कहना है कि “अब वोट सिर्फ विकास को मिलेगा, न कि जात-पात या प्रचार के वादों को।”
लोकतंत्र का असली उत्सव जारी
विरोध, हिंसा और असंतोष की घटनाओं के बावजूद बिहार में लोकतंत्र का यह उत्सव पूरी शांति और उत्साह के साथ जारी है। मतदाता अपने मत से यह तय कर रहे हैं कि आने वाले पांच सालों में बिहार की दिशा क्या होगी — विकास या वादे। 14 नवंबर को मतगणना के बाद यह साफ हो जाएगा कि बिहार की जनता ने किसे चुना — विकास के वादे करने वालों को या काम दिखाने वालों को।








