Bihar Niyojit Shikshak: 6 लाख से ज्यादा सर्टिफिकेट की जांच के बाद हड़कंप, बिहार में नियोजित शिक्षकों पर कार्रवाई तेज

बिहार में नियोजित शिक्षकों के 6.67 लाख से अधिक प्रमाणपत्रों की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। अब तक 1748 FIR दर्ज और 2953 लोग आरोपी बनाए गए हैं। जानिए पूरी रिपोर्ट।

On: Friday, March 6, 2026 9:57 PM
Bihar Niyojit Shikshak

Bihar Niyojit Shikshak: बिहार में नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर बड़ा खुलासा सामने आया है। राज्य के Bihar Special Vigilance Unit (निगरानी अन्वेषण ब्यूरो) ने वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों की जांच से जुड़ी अद्यतन रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और सरकारी तंत्र में हलचल तेज हो गई है। जांच में अब तक लाखों प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जा चुका है और कई मामलों में दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। इस पूरी कार्रवाई की निगरानी Patna High Court के आदेश के आधार पर की जा रही है।

लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि शिक्षक नियोजन प्रक्रिया के दौरान कुछ लोगों ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी हासिल की थी। अब जब सरकार ने व्यवस्थित तरीके से जांच शुरू की है, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। यह मामला केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। बिहार जैसे राज्य में जहां सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों का भविष्य शिक्षकों पर निर्भर करता है, वहां इस तरह के खुलासे शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाते हैं।

Bihar Niyojit Shikshak: 6.67 लाख प्रमाणपत्रों की जांच पूरी, कई दस्तावेज पाए गए फर्जी

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी 2026 तक कुल 6,67,144 प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जा चुका है। यह जांच अभियान पिछले कई वर्षों से चरणबद्ध तरीके से चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत किए गए अंकपत्र या प्रशिक्षण प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। इसी आधार पर अब तक राज्य के विभिन्न जिलों में 1,748 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। इन मामलों में कुल 2,953 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। खास बात यह है कि वर्ष 2026 की शुरुआत में ही कार्रवाई का सिलसिला जारी है।

जनवरी से 28 फरवरी 2026 के बीच ही 31 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 31 शिक्षकों को नामजद किया गया है। यह आंकड़े बताते हैं कि जांच की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है और जैसे-जैसे सत्यापन पूरा होता जा रहा है, वैसे-वैसे नए मामलों का खुलासा भी हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर दस्तावेजों की जांच करना एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है, लेकिन सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए लगातार कार्रवाई जारी रखी है।

वर्षों से चल रही कार्रवाई, 2022 में सबसे ज्यादा मामले दर्ज

यदि पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह साफ दिखाई देता है कि यह अभियान धीरे-धीरे व्यापक होता गया। शुरुआती दौर में मामले कम थे, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे फर्जी दस्तावेजों के मामले भी सामने आने लगे। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 में जहां केवल 67 मामले दर्ज हुए थे, वहीं वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 445 FIR तक पहुंच गई थी, जो इस पूरी कार्रवाई का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जाता है। इसके बाद वर्ष 2023 में 337, वर्ष 2024 में 111 और वर्ष 2025 में 136 मामले दर्ज किए गए।

यह आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि जांच अभियान लगातार जारी है और सरकार फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षक भर्ती में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की बुनियादी शिक्षा इसी पर निर्भर करती है। यदि किसी शिक्षक ने गलत तरीके से नौकरी हासिल की है तो इसका असर सीधे शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है।

शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर उठे सवाल, आगे और कार्रवाई संभव

इस पूरे मामले ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक नियोजन प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लंबे समय से राज्य में नियोजित शिक्षकों की भर्ती को लेकर विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार यह आरोप लगाया गया कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान पर्याप्त जांच नहीं हुई या कुछ लोगों ने गलत दस्तावेजों का सहारा लिया। अब जब निगरानी विभाग व्यवस्थित तरीके से जांच कर रहा है, तो ऐसे मामलों का खुलासा होना स्वाभाविक है। हालांकि इस कार्रवाई का एक सकारात्मक पहलू भी है—सरकार अब पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठा रही है।

यदि जांच में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है, तो इससे भविष्य में भर्ती प्रक्रिया अधिक साफ और विश्वसनीय बन सकती है। साथ ही इससे उन शिक्षकों को भी न्याय मिलेगा जिन्होंने सही तरीके से योग्यता के आधार पर नौकरी हासिल की है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच के अंतिम चरण में कितने और मामले सामने आते हैं और सरकार इस पूरे मुद्दे को किस तरह से सुलझाती है। फिलहाल इतना तय है कि बिहार में शिक्षक नियोजन से जुड़ा यह मामला आने वाले दिनों में भी चर्चा का बड़ा विषय बना रहेगा।

Read Also: Nishant Kumar: नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार कल थामेंगे पार्टी का दामन, राजनीति से दूरी के बाद अब सक्रिय भूमिका की तैयारी

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment