IGIMS: बिहार की राजधानी पटना स्थित IGIMS (इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान) ने न्यूरोलॉजिकल देखभाल में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने बाइप्लेन कार्डियोवैस्कुलर कैथ लैब सिस्टम DSA (डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी) के जरिए बिना सर्जरी के मस्तिष्क सर्जरी की शुरुआत की है।
इस तकनीक में क्या है खास
इस हाई-टेक मशीन की कीमत करीब 14 करोड़ रुपये है। पहले इसका इस्तेमाल दिल की बीमारियों के इलाज में होता था, लेकिन अब इसे मस्तिष्क के इलाज के लिए भी सफलतापूर्वक उपयोग में लाया जा रहा है। हाल ही में IGIMS की टीम ने बिना किसी सर्जिकल चीरे के एक मरीज के ब्रेन एन्यूरिज्म का इलाज किया — जो अपने आप में एक बड़ी सफलता है।
ब्रेन और हार्ट दोनों के लिए कारगर
कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. रवि विष्णु के मुताबिक, यह मशीन अब दिल और दिमाग दोनों की जटिल स्थितियों जैसे स्टेंट लगाना, थक्का हटाना, या ब्लॉकेज हटाना जैसे कामों में बिना ओपन सर्जरी के कारगर है इसमें लगे दो एक्स-रे कैमरे 3D इमेज बनाते हैं, जिससे डॉक्टर सटीक जगह को पहचान कर तुरंत इलाज कर सकते हैं।
कम समय में असरदार इलाज
इस अत्याधुनिक प्रणाली की मदद से इलाज अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज़ और सुरक्षित हो गया है। अधिकतर मामलों में उपचार केवल 4 से 6 घंटे में पूरा हो जाता है, जिससे मरीज को लंबा अस्पताल प्रवास नहीं करना पड़ता। साथ ही, इसमें कंट्रास्ट डाई और रेडिएशन का उपयोग भी सीमित होता है, जिससे शरीर पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है। सबसे खास बात यह है कि अब कई जटिल स्थितियों में भी ओपन सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यह तकनीक कम आक्रामक (मिनिमली इनवेसिव) विकल्प प्रदान करती है, जिससे रिकवरी भी तेज होती है।
बिहार के मरीजों को अब बाहर जाने की जरूरत नहीं
अब ब्रेन हेमरेज, एन्यूरिज्म, स्ट्रोक या वैस्कुलर ब्लॉकेज जैसी गंभीर बीमारियों के लिए मरीजों को दिल्ली या अन्य शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। IGIMS की यह पहल राज्य में न्यूरो और कार्डियो केयर को एक नई ऊंचाई पर ले जा रही है। IGIMS की टीम मानती है कि यह सिस्टम आने वाले समय में और भी तेज़, सुरक्षित और कम खर्चीले इलाज के रास्ते खोलेगा।