Mahagathbandhan: कांग्रेस की हार तेजस्वी जिम्मेदार, बिहार चुनाव के बाद कांग्रेस ने इन लोगों पर फोडा़ हार का ठीकरा

On: Saturday, November 29, 2025 9:05 AM
Congress Allegations On Mahagathbandhan

Congress Allegations On Mahagathbandhan: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब महागठबंधन टूटने की कगार पर पहुंच चुका है. इस बार देखा जाए तो महागठबंधन केवल 25 सीटों पर सिमट गई. इसके बाद अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तेजस्वी यादव से दोस्ती कांग्रेस को महंगी पड़ रही है. इसी सिलसिले में जब बिहार कांग्रेस में समीक्षा बैठक की गई तो हार का ठीकरा गठबंधन पर फोड़ा गया. कांग्रेस का साफ तौर पर कहना है कि तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी और लेफ्ट के कई नेताओं की वजह से कांग्रेस की बिहार चुनाव में इस तरह से बुरी हार हुई.

Mahagathbandhan: कांग्रेस की हार के लिए RJD जिम्मेदार

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के ऊपर कांग्रेस ने इस वक्त बहुत बड़ा आरोप लगाया है. दिल्ली में बिहार कांग्रेस की करारी हार के बाद समीक्षा बैठक हुई जिसमें मल्लिका अर्जुन खड़गे और राहुल गांधी के सामने कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी के हार का ठीकरा महा गठबंधन पर फोड़ दिया. यह बातें भी सामने आई है कि गठबंधन की वजह से ही कांग्रेस की इतनी बुरी स्थिति हुई.

अंदर खाने से तो यह भी आवाज आ रही है कि तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के अड़ियल रवैये ने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया है. समीक्षा बैठक में जो बात सामने आई है, उसमें सबसे बड़ी बात यह है कि कांग्रेस के साथ राजद ने गठबंधन धर्म नहीं निभाया. पार्टी का यह भी आरोप है कि कांग्रेस प्रत्याशियों के खिलाफ तेजस्वी यादव ने अपने उम्मीदवार उतारे. लेफ्ट ने भी कांग्रेस की अनदेखी करते हुए उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारे. कांग्रेस ने माना है कि 11 सीटों पर फ्रेंडली फाइट से उनको नुकसान हुआ है.

गठबंधन में दिखी तालमेल की कमी

समीक्षा बैठक में यह भी कहा गया कि कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करने के लिए तेजस्वी यादव के ऑफिस से पैसे मांगे जाते थे. मुकेश सहनी के ऑफिस से भी पैसे और उपहार की डिमांड होती थी. बिहार कांग्रेस प्रभारी ने भी इस बात को माना है कि गठबंधन में समन्वय की कमी के कारण हार मिली.

बिहार चुनाव में गठबंधन के बीच किस तरह से तालमेल की कमी हुई हैं, अब यह बात भी सार्वजनिक रूप से सामने आ रही है. कांग्रेस का यह भी कहना है कि सीट बंटवारे में देरी होने के कारण भी उनकी पार्टी को नुकसान पहुंचा है. सीट और उम्मीदवारों का चयन पहले से होना चाहिए था. देरी की वजह से चुनावी तैयारी के लिए समय नहीं मिला.

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