Goat Milk Bihar: बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब सुधा डेयरी बूथों पर गाय और भैंस के दूध के साथ-साथ बकरी का दूध भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह फैसला न सिर्फ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए अच्छी खबर है, बल्कि इससे राज्य के हजारों पशुपालकों को भी फायदा होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार बकरी का दूध पोषण से भरपूर होता है और कई बीमारियों में लाभकारी माना जाता है। यही वजह है कि सरकार इसे आम लोगों तक पहुंचाने की योजना बना रही है।
Goat Milk Bihar: 90% तक सब्सिडी के साथ बढ़ेगा बकरी पालन
सरकार ने बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए गरीब परिवारों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। योजना के तहत बीपीएल परिवारों को 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान पर तीन प्रजनन योग्य बकरियां दी जाएंगी, जिससे वे कम लागत में अपना व्यवसाय शुरू कर सकेंगे। इस योजना का उद्देश्य गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना और पशुपालकों की आय बढ़ाना है। सरकार चाहती है कि ग्रामीण सीधे बकरी का दूध सुधा को बेचें, जिससे उन्हें नियमित आय का स्रोत मिल सके। अब तक राज्य के 34,218 परिवारों को 1,02,654 बकरियां वितरित की जा चुकी हैं, जो इस योजना की सफलता की ओर इशारा करता है।
इन शहरों से होगी बकरी के दूध की बिक्री की शुरुआत
सरकार की योजना के अनुसार शुरुआत में भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा और पूर्णिया जैसे प्रमुख शहरों में बकरी के दूध की बिक्री शुरू की जाएगी। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर रहा है जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके अलावा नगर निगम और नगर निकायों के माध्यम से बकरे के मांस की बिक्री की भी तैयारी चल रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे न सिर्फ बाजार का विस्तार होगा बल्कि पशुपालकों को बेहतर दाम भी मिल पाएंगे।
हर पंचायत में सुधा बूथ और गोट फेडरेशन की तैयारी
बकरी पालन को संगठित और वैज्ञानिक तरीके से बढ़ावा देने के लिए सरकार कई नई योजनाओं पर काम कर रही है। राज्य की हर पंचायत में सुधा डेयरी बूथ खोलने की योजना बनाई जा रही है। साथ ही राज्य स्तर पर गोट फेडरेशन का गठन किया जाएगा और हर जिले में गोट स्पेशलिस्ट की नियुक्ति होगी। इन विशेषज्ञों को प्रशिक्षण के लिए केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान भेजा जाएगा। आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 12 करोड़ बकरियां हैं, जिनमें से करीब 1.28 करोड़ बकरियां बिहार में हैं, और इसी कारण राज्य देश में चौथे स्थान पर है। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल आने वाले वर्षों में बिहार के ग्रामीण इलाकों की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है।
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