NEET Student Murder Case: पटना में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की मौत आज सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रह गई है। यह मामला अब बिहार पुलिस की कार्यशैली, निष्पक्षता और जवाबदेही पर सीधा सवाल बन चुका है। जब एक छात्रा की संदिग्ध हालात में मौत होती है, जांच पर सवाल उठते हैं और अंत में राज्य सरकार को CBI जांच की सिफारिश करनी पड़ती है, तो साफ है कि कहीं न कहीं सिस्टम चूक गया है।
सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या बिहार की ‘सम्राट’ पुलिस इस मामले में हार मान चुकी है?
NEET Student Murder Case: पूरा मामला समझिए शुरुआत से अब तक
पीड़िता जहानाबाद की रहने वाली थी और NEET की तैयारी के लिए पटना आई थी। 5 जनवरी, छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंचती है। 6 जनवरी, अगले ही दिन छात्रा को बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया जाता है। पहले एक निजी अस्पताल, फिर प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल।
यहीं से मामला संदिग्ध हो जाता है, लेकिन पुलिस की भूमिका सवालों में आ जाती है। न तो घटनास्थल को सुरक्षित किया गया, न हॉस्टल को सील किया गया, न समय पर जांच शुरू हुई। 9 जनवरी, छात्रा की हालत बिगड़ने पर उसे मेदांता अस्पताल रेफर किया जाता है। 11 जनवरी, इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो जाती है।
मौत के बाद जल्दबाजी और गलत दिशा
छात्रा की मौत के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मीडिया के सामने आए और बिना ठोस जांच के ही आत्महत्या की बात कह दी गई। यह वही बिंदु है, जहां से पुलिस की मंशा और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे। क्योंकि न पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई थी, न फॉरेंसिक जांच पूरी हुई थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आते ही मामला पूरी तरह पलट गया। रिपोर्ट में दुष्कर्म की आशंका जताई गई। इसके बाद पुलिस की शुरुआती थ्योरी कमजोर पड़ने लगी। इसके बाद जब FSL रिपोर्ट आई, तो स्थिति और गंभीर हो गई।
FSL रिपोर्ट: आत्महत्या की थ्योरी धराशायी
फॉरेंसिक रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर पुरुष का स्पर्म पाए जाने की पुष्टि हुई। यानी मामला सिर्फ आत्महत्या नहीं, बल्कि दुष्कर्म और हत्या की ओर इशारा करने लगा।
अब सवाल यह था, अगर यह सबूत मौजूद थे, तो पहले दिन से इस एंगल पर जांच क्यों नहीं हुई?
पुलिस की लापरवाही पर कार्रवाई, लेकिन क्या काफी है? मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में:
- चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी को सस्पेंड किया गया
- एक दारोगा पर भी कार्रवाई हुई
यह कार्रवाई अपने आप में इस बात की स्वीकारोक्ति है कि शुरुआती जांच में गंभीर चूक हुई थी।
DNA जांच: सवाल अब भी बाकी
पुलिस ने अब तक करीब 25 लोगों के DNA सैंपल लिए हैं, जिनमें से 15 सैंपल पीड़िता के परिवार के हैं।
FSL के अनुसार आरोपी की उम्र 18 से 24 साल के बीच हो सकती है।
लेकिन सवाल अब भी खड़े हैं:
- मुख्य संदिग्धों के सैंपल देर से क्यों लिए गए?
- क्या जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है?
परिजनों का आक्रोश और पुलिस पर गंभीर आरोप
डीजीपी विनय कुमार से मुलाकात के बाद पीड़िता के परिजन बेहद आक्रोशित नजर आए। उनका आरोप है कि:
- पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है
- आत्महत्या मानने का दबाव बनाया गया
- उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं दिख रही
यहीं से यह मामला सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि न्याय और भरोसे का संकट बन गया।
CBI जांच की सिफारिश: पुलिस की नाकामी का संकेत?
शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से इस मामले की CBI जांच की सिफारिश की।
डिप्टी सीएम और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने इसकी जानकारी सार्वजनिक की। यह कदम साफ संकेत देता है कि राज्य पुलिस पर भरोसा कमजोर पड़ चुका था।
CBI के सामने अब ये बड़े सवाल
CBI जांच शुरू होने पर इन अहम बिंदुओं की पड़ताल होगी:
- शुरुआती दिनों में जांच क्यों नहीं हुई
- सबूत सुरक्षित क्यों नहीं रखे गए
- आत्महत्या की थ्योरी किस आधार पर बनाई गई
- AIIMS रिपोर्ट में देरी क्यों हुई
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई
मामला एक छात्रा का नहीं, सिस्टम का है
NEET छात्रा हत्याकांड आज बिहार की कानून व्यवस्था की अग्निपरीक्षा बन चुका है।
अब CBI जांच से ही यह साफ होगा कि—
- दोषी कौन है
- और लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार
आज सवाल सिर्फ एक नहीं, कई हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या बिहार में आम नागरिक को सच में न्याय मिल पाएगा?







