Panchayat News Bihar: विधानसभा में बड़ा संकेत: पंचायत प्रतिनिधियों की सड़क हादसे में मौत पर 10 लाख मुआवजा देने पर विचार

बिहार विधानसभा में बड़ा ऐलान, मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों की सड़क हादसे में मौत पर 10 लाख रुपये अनुग्रह अनुदान देने पर विचार। पीएम आवास योजना और जीविका दीदियों पर भी चर्चा।

On: Wednesday, February 11, 2026 1:31 PM
Panchayat News Bihar

Panchayat News Bihar: बिहार विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को एक ऐसा मुद्दा उठा, जिसने गांव-देहात की राजनीति से जुड़े हजारों जनप्रतिनिधियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सवाल यह था कि क्या मुखिया और त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों की सड़क दुर्घटना में मौत होने पर मिलने वाला अनुग्रह अनुदान बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया जाएगा? इस पर सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह पंचायत प्रतिनिधियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

यह चर्चा ऐसे समय में हुई है, जब ग्रामीण इलाकों में कामकाज के दौरान सड़क हादसों की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। पंचायत प्रतिनिधि अक्सर विकास योजनाओं के निरीक्षण, बैठकों और क्षेत्रीय दौरे पर रहते हैं, जिससे जोखिम भी बढ़ जाता है।

Panchayat News Bihar: 4 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने की मांग क्यों?

फिलहाल बिहार में सामान्य सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने का प्रावधान है। यही राशि मुखिया और अन्य पंचायत प्रतिनिधियों पर भी लागू होती है। लेकिन भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि पंचायत प्रतिनिधि भी जनसेवक हैं और अपने कर्तव्यों के दौरान जोखिम उठाते हैं। ऐसे में उनके लिए विशेष प्रावधान होना चाहिए।

उन्होंने सरकार से मांग की कि सड़क हादसे में उनकी मौत होने पर अनुग्रह अनुदान की राशि 10 लाख रुपये की जाए। इस पर पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश ने सदन में भरोसा दिलाया कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। यह बयान अपने आप में बड़ा संकेत माना जा रहा है।

ग्रामीण स्तर पर मुखिया और पंचायत सदस्य विकास योजनाओं की रीढ़ माने जाते हैं। ऐसे में उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देना सामाजिक दृष्टि से भी अहम कदम हो सकता है।

जीविका दीदियों के लिए ड्रेस कोड और पहचान पत्र की मांग

बजट सत्र में एक और अहम मुद्दा उठा। सासाराम से विधायक स्नेहलता ने जीविका दीदियों के लिए ड्रेस कोड और पहचान पत्र जारी करने की मांग की। उनका कहना था कि ड्रेस कोड से उनकी अलग पहचान बनेगी और पहचान पत्र से आधिकारिक मान्यता मजबूत होगी।इस पर मंत्री श्रवण कुमार ने जवाब देते हुए कहा कि ड्रेस कोड की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। हालांकि उन्होंने जवाब में सुरक्षा का जिक्र किया, जिस पर विधायक ने स्पष्ट किया कि उनका सवाल पहचान पत्र को लेकर था, न कि सुरक्षा को लेकर।

यह संवाद सदन में चर्चा का विषय बना रहा। बिहार में जीविका दीदियां स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में उनकी पहचान और औपचारिक मान्यता को लेकर उठी मांग को भी अहम माना जा रहा है।

स्टेट नोडल अकाउंट न बनने से पीएम आवास योजना पर असर

विधानसभा में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। जानकारी दी गई कि बिहार सरकार अब तक स्टेट नोडल अकाउंट (SNA) नहीं बना पाई है, जिसके कारण केंद्र सरकार ने योजना की राशि पर रोक लगा दी थी। पहले 31 जनवरी तक की समय-सीमा तय थी, लेकिन तय समय में प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। मंत्री श्रवण कुमार ने सदन में स्वीकार किया कि निर्धारित अवधि में नोडल अकाउंट नहीं बन पाया। हालांकि राज्य सरकार के अनुरोध पर जनवरी में अस्थायी रूप से राशि निकासी की अनुमति दी गई थी, ताकि लाभार्थियों को परेशानी न हो।

अब सरकार ने केंद्र से 31 मार्च तक का अतिरिक्त समय मांगा है। सरकार का कहना है कि स्टेट नोडल अकाउंट बनाने की प्रक्रिया जारी है और जल्द इसे पूरा कर लिया जाएगा।

स्टेट नोडल अकाउंट क्यों है जरूरी?

स्टेट नोडल अकाउंट केंद्र प्रायोजित योजनाओं में पारदर्शिता और फंड के सीधे ट्रांसफर के लिए अनिवार्य है। इसके बिना राशि के उपयोग और ट्रैकिंग में तकनीकी अड़चनें आती हैं। यही कारण है कि पीएम आवास योजना की राशि के ट्रांसफर पर असर पड़ा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और शहरी गरीबों के लिए बेहद महत्वपूर्ण योजना है। यदि फंड ट्रांसफर में देरी होती है, तो इसका सीधा असर लाभार्थियों पर पड़ता है, जिनका घर बनने का सपना अधूरा रह सकता है। जदयू विधायक मंजीत सिंह के सवाल पर मंत्री ने स्वीकार किया कि फिलहाल योजना की राशि रुकी हुई है। हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जल्द तकनीकी प्रक्रिया पूरी कर समस्या का समाधान किया जाएगा।

पंचायत से लेकर योजना तक, सरकार पर बढ़ा दबाव

बजट सत्र में उठे इन मुद्दों से साफ है कि सरकार पर पंचायत प्रतिनिधियों की सुरक्षा, महिलाओं के सशक्तिकरण और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के सुचारु संचालन को लेकर दबाव बढ़ा है। एक ओर जनप्रतिनिधियों के लिए 10 लाख अनुग्रह अनुदान पर विचार की बात है, तो दूसरी ओर पीएम आवास योजना जैसी अहम योजना के फंड ट्रांसफर का सवाल भी है। ग्रामीण बिहार में इन फैसलों का सीधा असर पड़ता है। पंचायत प्रतिनिधि गांव की पहली कड़ी होते हैं और सरकारी योजनाएं आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा कोई भी फैसला राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

बिहार विधानसभा के बजट सत्र में उठे मुद्दों ने कई अहम संकेत दिए हैं। पंचायत प्रतिनिधियों की सड़क हादसे में मौत पर 10 लाख रुपये अनुग्रह अनुदान देने का प्रस्ताव यदि लागू होता है, तो यह उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। वहीं जीविका दीदियों के ड्रेस कोड और पहचान पत्र की मांग महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में कदम हो सकती है। दूसरी ओर स्टेट नोडल अकाउंट में देरी से पीएम आवास योजना पर पड़ा असर सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इन घोषणाओं और आश्वासनों को कितनी जल्दी जमीनी हकीकत में बदल पाती है।

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