Petrol-Diesel Price Formula: पेट्रोल-डीजल की कीमत कैसे तय होती है? पूरी प्रक्रिया समझिए आसान भाषा में

पेट्रोल-डीजल की कीमत कैसे तय होती है? क्रूड ऑयल, टैक्स, VAT और डेली प्राइस रिवीजन सिस्टम का पूरा फॉर्मूला आसान भाषा में जानें।

On: Wednesday, February 4, 2026 11:13 AM
Petrol-Diesel Price Formula

Petrol-Diesel Price Formula: भारत में जब भी पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ते या घटते हैं, तो आम आदमी के मन में एक ही सवाल उठता है—आखिर पेट्रोल-डीजल की कीमत तय कैसे होती है? क्या सरकार मनमाने तरीके से दाम बढ़ा देती है या इसके पीछे कोई तय फॉर्मूला है? इस आर्टिकल में हम Petrol-Diesel Price Formula को बेहद आसान और स्पष्ट भाषा में समझेंगे, ताकि आपको हर रुपये का हिसाब समझ आ सके।

Petrol-Diesel Price Formula:भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें इतनी अहम क्यों हैं?

पेट्रोल और डीज़ल सिर्फ वाहन चलाने का ईंधन नहीं हैं, बल्कि ये देश की पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। इनकी कीमत बढ़ते ही महंगाई, ट्रांसपोर्ट खर्च, खाने-पीने की चीज़ों के दाम और आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि पेट्रोल-डीजल का प्राइस फॉर्मूला क्या है।

सबसे पहला फैक्टर – Crude Oil Price

पेट्रोल और डीज़ल कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल से बनते हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% क्रूड ऑयल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत डॉलर में तय होती है।

  • अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़ती है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे हो जाते हैं
  • अगर क्रूड सस्ता होता है, तो कीमतों में गिरावट की संभावना बनती है

यानी पेट्रोल-डीजल की कीमत तय होने का पहला और सबसे बड़ा आधार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत है।

दूसरा बड़ा कारण – डॉलर के मुकाबले रुपया

क्रूड ऑयल की खरीद डॉलर में होती है। ऐसे में अगर रुपया कमजोर होता है, तो भले ही क्रूड की कीमत स्थिर रहे, भारत को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमत पर पड़ता है।

  • रुपया कमजोर = पेट्रोल-डीजल महंगे
  • रुपया मजबूत = कीमतों पर दबाव कम

रिफाइनिंग कॉस्ट: कच्चे तेल को पेट्रोल-डीजल बनाने की कीमत

क्रूड ऑयल सीधे इस्तेमाल लायक नहीं होता। इसे रिफाइनरियों में प्रोसेस करके पेट्रोल, डीज़ल और अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया पर जो खर्च आता है, उसे Refining Cost कहा जाता है। भारत में IOC, BPCL, HPCL जैसी सरकारी और निजी कंपनियां यह काम करती हैं। रिफाइनिंग कॉस्ट आमतौर पर ज्यादा नहीं होती, लेकिन कीमत तय करने में इसका योगदान जरूर होता है।

केंद्र सरकार का टैक्स: एक्साइज ड्यूटी

अब आते हैं उस हिस्से पर जो अक्सर चर्चा में रहता है—टैक्स। केंद्र सरकार पेट्रोल और डीज़ल पर Excise Duty लगाती है।

  • यह टैक्स तय रकम (Fixed Amount) होता है
  • क्रूड सस्ता हो या महंगा, टैक्स लगभग समान रहता है

कई बार ऐसा देखा गया है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होता है, तब भी टैक्स ज्यादा होने की वजह से पेट्रोल-डीजल सस्ते नहीं होते।

राज्य सरकार का टैक्स: VAT

केंद्र के बाद राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर VAT (Value Added Tax) लगाती हैं। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग होते हैं।

  • VAT प्रतिशत के हिसाब से लगाया जाता है
  • जिस राज्य में VAT ज्यादा, वहां पेट्रोल-डीजल महंगे

उदाहरण के लिए, दिल्ली में VAT अपेक्षाकृत कम, जबकि बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में VAT ज्यादा होने से कीमत अधिक होती है।

डीलर कमीशन: पेट्रोल पंप मालिक का हिस्सा

पेट्रोल पंप संचालकों को भी हर लीटर पर कमीशन दिया जाता है, जिसे Dealer Commission कहा जाता है। हालांकि यह हिस्सा ज्यादा बड़ा नहीं होता, लेकिन कीमत तय करने के फॉर्मूले में इसे भी जोड़ा जाता है।

डेली प्राइस रिवीजन सिस्टम क्या है?

भारत में जून 2017 से Daily Price Revision System लागू है। इस सिस्टम के तहत पेट्रोल-डीजल की कीमतें रोजाना अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से तय होती हैं।

  • हर दिन सुबह 6 बजे नई कीमतें लागू होती हैं
  • कीमतों में मामूली बढ़ोतरी या कमी होती है

हालांकि चुनाव या खास परिस्थितियों में कई बार कीमतें स्थिर भी रखी जाती हैं।

आखिर एक लीटर पेट्रोल-डीजल की कीमत कैसे बनती है?

अगर आसान भाषा में समझें, तो पेट्रोल-डीजल की कीमत इस तरह बनती है:

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत
  • डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट
  • रिफाइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट
  • केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
  • राज्य सरकार का VAT
  • डीलर कमीशन

इन सभी को जोड़कर ही आपके शहर में पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत तय होती है।

क्या पेट्रोल-डीजल सस्ते हो सकते हैं?

यह सवाल हर किसी के मन में होता है। अगर क्रूड ऑयल सस्ता हो, रुपया मजबूत रहे और केंद्र व राज्य सरकारें टैक्स में कटौती करें, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन चूंकि टैक्स सरकार की आमदनी का बड़ा जरिया है, इसलिए अक्सर कीमतों में बड़ी कटौती नहीं हो पाती। Petrol-Diesel Price Formula Explained को समझने के बाद यह साफ हो जाता है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत सिर्फ सरकार की मर्जी से तय नहीं होती, बल्कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार, टैक्स सिस्टम और आर्थिक स्थितियां जिम्मेदार होती हैं। जब तक टैक्स स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव नहीं होता, तब तक आम लोगों को पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।

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