Sonepur Mela 2025: 11 लाख का ‘साधु’ बना घोड़ा बाजार का स्टार, 40 KM की रफ्तार और कई खिताबों के साथ मचा रहा धूम

Sonepur Mela 2025: बिहार का ऐतिहासिक सोनपुर मेला (Sonepur Mela 2025) एक बार फिर अपने पूरे शबाब पर है। हरिहरक्षेत्र ... Read more

On: Friday, November 7, 2025 12:25 PM
Sonepur Mela 2025

Sonepur Mela 2025: बिहार का ऐतिहासिक सोनपुर मेला (Sonepur Mela 2025) एक बार फिर अपने पूरे शबाब पर है। हरिहरक्षेत्र सोनपुर में लगने वाला यह विश्व-प्रसिद्ध पशु मेला परंपरा, संस्कृति और व्यापार का संगम है। मेले का विधिवत उद्घाटन 9 नवंबर को होना है, और तैयारियां ज़ोरों पर हैं। दूर-दूर से व्यापारी, पशु प्रेमी और पर्यटक यहां पहुंचने लगे हैं। लेकिन इस बार घोड़ा बाजार में चर्चा सिर्फ़ एक नाम की है — ‘साधु’, जो मेले का सुपरस्टार बन चुका है।

Sonepur Mela 2025: 11 लाख का ‘साधु’ बना चर्चा का केंद्र

‘साधु’ कोई आम घोड़ा नहीं, बल्कि माड़वाड़ नस्ल का शानदार और रॉयल घोड़ा है। इसकी कीमत ₹11 लाख रखी गई है और इसे देखने के लिए रोजाना सैकड़ों लोग घोड़ा बाजार में जुट रहे हैं। ‘साधु’ का मालिक वैशाली जिले के महुआ निवासी अशोक यादव हैं, जो इस बार 16 बेहतरीन नस्लों के घोड़ों के साथ सोनपुर मेले में पहुंचे हैं। अशोक यादव बताते हैं “हमारे पास कई अच्छे घोड़े हैं, लेकिन ‘साधु’ हमारी जान है। इसकी चाल, कद-काठी और रफ्तार देखकर हर कोई दंग रह जाता है।”

40 KM प्रति घंटा की रफ्तार और कई खिताब

‘साधु’ की सबसे बड़ी खासियत है इसकी तेज रफ्तार 40 किमी प्रति घंटा। यह घोड़ा अब तक कई प्रतियोगिताओं में विजेता रह चुका है और 42 घोड़ों को पछाड़कर पहला स्थान हासिल कर चुका है। यह पुष्कर मेला, लखनऊ हॉर्स शो और बिहार के कई घुड़दौड़ आयोजनों में अपनी ताक़त और फुर्ती का लोहा मनवा चुका है।

सोनपुर मेले का सबसे बड़ा आकर्षण हमेशा से घोड़ा बाजार रहा है। इस बार भी देशभर से राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के व्यापारी यहां पहुंचे हैं। लेकिन हर कोई ‘साधु’ को देखने, उसकी चाल की वीडियो बनाने और तस्वीर खिंचवाने में लगा है। घोड़ा बाजार के संचालक मुकेश कुमार सिंह बताते हैं “बारिश और चुनाव के कारण इस बार घोड़ों की आमद थोड़ी देरी से हो रही है। लेकिन मेले में 2000 से ज्यादा घोड़ों के आने की उम्मीद है। जैसे ही चुनाव खत्म होंगे, बाजार पूरी तरह गुलजार हो जाएगा।”

परंपरा, संस्कृति और व्यापार का संगम

सोनपुर मेला सिर्फ़ व्यापार का नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यहां पशु प्रदर्शनी, लोक संगीत, नृत्य, झूले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।घोड़े, हाथी, ऊंट, बैल और अन्य पशुओं की खरीद-बिक्री के साथ-साथ यह मेला ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी एक अहम हिस्सा है।

‘साधु’ बना सोशल मीडिया सेंसेशन

सोनपुर मेले में आने वाले हर व्यक्ति की नज़र ‘साधु’ पर ठहर रही है। लोग फोटो, रील्स और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। #SadhuHorse और #SonepurMela2025 जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। अशोक यादव का कहना है “लोग साधु को देखने के बाद खुद कहते हैं कि यह घोड़ा नहीं, जीता-जागता शेर है। इसकी खूबसूरती और चाल देखकर हर कोई इसे खरीदना चाहता है, लेकिन यह हमारे परिवार का हिस्सा है।”

  क्या 11 लाख का ‘साधु’ बदलेगा मालिक?

मेले में हर दिन ‘साधु’ की कीमत पूछने वाले खरीदारों की भीड़ बढ़ती जा रही है। कई लोग इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, लेकिन अशोक यादव फिलहाल इसे बेचने के मूड में नहीं हैं। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं “साधु के बिना मेला अधूरा है, देखते हैं इस बार कौन इसे अपने साथ ले जा पाता है।”

सोनपुर मेला 2025 की हर रौनक के बीच ‘साधु’ सिर्फ़ एक घोड़ा नहीं, बल्कि गौरव, परंपरा और शान का प्रतीक बन गया है। यह मेला आने वाले दिनों में और भी रंगीन होगा, जब देशभर के व्यापारी, खरीदार और दर्शक एक साथ यहां जुटेंगे।

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