Bihar Politics News: क्या दिल्ली की राह पकड़ेंगे नीतीश? सीएम हाउस की बैठक के बाद बिहार की सियासत में तेज हुई हलचल

पटना में सीएम आवास की बैठक के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। क्या नीतीश कुमार राज्यसभा के जरिए दिल्ली जाएंगे? जानिए पूरी सियासी कहानी।

On: Thursday, March 5, 2026 7:57 AM
Bihar Politics News

Bihar Politics News: बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों सियासी हलचल अपने चरम पर है। सत्ता के गलियारों में चल रही चर्चाओं ने राज्य की राजनीति को अचानक गर्मा दिया है। बुधवार शाम मुख्यमंत्री आवास पर हुई एक अहम बैठक के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब दिल्ली की राजनीति की ओर रुख कर सकते हैं। शाम करीब छह बजे से शुरू हुई यह बैठक देर रात तक चली और इसमें जदयू के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। बैठक में जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और वरिष्ठ मंत्री विजय चौधरी की मौजूदगी ने इस बैठक को और भी अहम बना दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक सामान्य बैठक नहीं थी, बल्कि बिहार की राजनीति के भविष्य से जुड़ा बड़ा फैसला भी हो सकता है। अगर नीतीश कुमार राज्यसभा के जरिए दिल्ली जाते हैं, तो यह सिर्फ पद परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव ला सकता है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से मुख्यमंत्री आवास पर लगातार बैठकें हो रही हैं, उससे सियासी अटकलों को लगातार बल मिल रहा है।

Bihar Politics News: क्या राज्यसभा के जरिए दिल्ली जाएंगे नीतीश कुमार?

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में वरिष्ठ मंत्री विजय चौधरी ने साफ कहा कि अंतिम फैसला खुद नीतीश कुमार को ही लेना है। हालांकि उन्होंने इस बात से भी इनकार नहीं किया कि पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा चल रही है। जदयू के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का अनुभव और नेतृत्व अभी भी जरूरी है, इसलिए वे नहीं चाहते कि वे दिल्ली की राजनीति में चले जाएं। लेकिन दूसरी ओर कुछ राजनीतिक समीकरण ऐसे भी हैं जो संकेत देते हैं कि केंद्र की राजनीति में उनकी भूमिका बढ़ सकती है।

पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार एक केंद्रीय चेहरा रहे हैं। विकास, सामाजिक संतुलन और गठबंधन राजनीति की उनकी शैली ने उन्हें देश के सबसे अनुभवी मुख्यमंत्रियों में शामिल किया है। ऐसे में अगर वे दिल्ली जाते हैं तो यह कदम केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर की रणनीति का हिस्सा भी माना जाएगा। राज्यसभा के जरिए उनका दिल्ली जाना कई राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है। यही वजह है कि बिहार से लेकर दिल्ली तक इस संभावित फैसले को लेकर गहरी नजर रखी जा रही है।

क्या राजनीति में आएंगे निशांत कुमार?

इसी बीच एक और चर्चा तेजी से फैल रही है—मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री। अब तक राजनीति से दूर रहने वाले निशांत का नाम अचानक चर्चा में आने से सियासी माहौल और गर्म हो गया है। सूत्रों के मुताबिक वे जल्द ही जदयू की सदस्यता ले सकते हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है, लेकिन इस संभावना से इनकार भी नहीं किया गया है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर नीतीश कुमार दिल्ली की ओर रुख करते हैं तो बिहार की सत्ता में नया चेहरा सामने आ सकता है। कुछ लोग यह कयास भी लगा रहे हैं कि भविष्य में निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि यह सब फिलहाल अटकलों के दायरे में है, लेकिन बिहार की राजनीति में परिवार आधारित नेतृत्व की परंपरा को देखते हुए इन चर्चाओं को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा रहा। अगर ऐसा होता है तो यह जदयू की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा और पार्टी के भविष्य की दिशा भी बदल सकती है।

अमित शाह का पटना दौरा और NDA की रणनीति

इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पटना दौरा भी राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। वे भाजपा नेता नितिन नबीन के नामांकन कार्यक्रम में शामिल होने पटना पहुंचेंगे। गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे एनडीए के उम्मीदवारों के साथ नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है, क्योंकि आज नामांकन का अंतिम दिन है। ऐसे में अमित शाह का यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार की राजनीति में इस समय कई स्तरों पर समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं। अगर नीतीश कुमार दिल्ली जाते हैं तो सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि बिहार की कमान किसके हाथ में जाएगी। क्या जदयू से कोई नया चेहरा सामने आएगा या फिर भाजपा से मुख्यमंत्री बनाया जाएगा? इन सवालों के जवाब फिलहाल सस्पेंस में हैं। लेकिन इतना तय है कि पटना से दिल्ली तक फैली इस सियासी बिसात पर हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाया जा रहा है। आने वाले कुछ घंटे बिहार की राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय कर सकते हैं।

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