Anant Singh Story: साधु बनने के लिए 9 साल में घर छोड़ा, कभी नीतीश को सिक्को से तौला; जाने अनंत सिंह की अनोखी कहानी

Anant Singh Story: बिहार की राजनीति में मोकामा के ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत रद्द कर दी है और 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चांदी के सिक्कों…

On: Saturday, October 31, 2026 8:13 PM
Anant Singh

Anant Singh Story: बिहार की राजनीति में मोकामा के ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत रद्द कर दी है और 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चांदी के सिक्कों से तौलने वाले अनंत सिंह का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी।

9 साल की उम्र में साधु बनने के लिए छोड़ दिया था घर


अनंत सिंह के जीवन से जुड़ा एक चर्चित किस्सा उनके बचपन से जुड़ा है। बताया जाता है कि बचपन में उनके मन में साधु बनने की इच्छा थी। इसी वजह से महज 9 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया था। हालांकि, बाद में वह वापस लौट आए और धीरे-धीरे पारिवारिक तथा राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ गए।

Anant Singh News: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की जमानत

मोकामा विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 30 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत अनंत सिंह को 19 मार्च 2026 को जमानत मिली थी। अदालत ने उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक संबंधित अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस को मामले की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का भी आदेश दिया है। यह याचिका दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने दाखिल की थी। उन्होंने अनंत सिंह को मिली जमानत को चुनौती दी थी।

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कौन हैं मोकामा के छोटे सरकार अनंत सिंह? ( Anant Singh Biography)

अनंत सिंह बिहार के मोकामा विधानसभा क्षेत्र के चर्चित नेताओं में शामिल हैं। उन्हें इलाके में ‘छोटे सरकार’ के नाम से जाना जाता है। उनके बड़े भाई दिलीप सिंह भी मोकामा से विधायक रह चुके हैं। स्थानीय राजनीति में परिवार के प्रभाव के कारण अनंत सिंह की पहचान धीरे-धीरे मजबूत होती गई।

जब नीतीश कुमार को सिक्कों से तौला था

अनंत सिंह का नाम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ भी जुड़ता रहा है। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार बाढ़ सीट से चुनाव लड़ रहे थे। उस समय अनंत सिंह ने उनके समर्थन में प्रचार किया था।

इसी दौरान एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार को चांदी के सिक्कों से तौला गया था। यह घटना काफी चर्चा में रही। इसके बाद वर्ष 2005 में अनंत सिंह ने जेडीयू के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बनने का सफर शुरू किया।

निर्दलीय से RJD और फिर JDU तक का सफर

अनंत सिंह ने 2005 और 2010 में जेडीयू के टिकट पर जीत दर्ज की। वर्ष 2015 में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2020 में वह आरजेडी के टिकट पर विधायक बने। बाद में 2025 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के टिकट पर मोकामा से फिर जीत दर्ज की।

हालांकि, उनके राजनीतिक सफर के साथ कई आपराधिक मामले भी जुड़े रहे हैं। वर्ष 2019 में उनके घर से एके-47 बरामद होने का मामला सामने आया था, जिसमें उन्हें सजा भी हुई थी।

क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड?

30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोकामा में हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। वह जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रियदर्शी पीयूष के समर्थन में प्रचार कर रहे थे।

इस मामले में अनंत सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए। पुलिस ने 1 नवंबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार किया था। हालांकि, अनंत सिंह ने खुद पर लगे आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। मामले में अंतिम फैसला अदालत को करना है।

जेडीयू ने छह साल के लिए किया निष्कासित

कानूनी मुश्किलों के बीच जेडीयू ने 24 अक्टूबर 2026 को अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी ने यह कार्रवाई कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर की थी।

अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा। ऐसे में मोकामा के ‘छोटे सरकार’ की राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं।

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