Bihar Smart Meter पर सवाल: 113 यूनिट बिजली खपत, फिर भी कट रहे पैसे! ऐप और कस्टमर सपोर्ट के आंकड़ों में बड़ा अंतर

बिहार में SBPDCL स्मार्ट मीटर पर सवाल! उपभोक्ता के ऐप में 113 यूनिट और कस्टमर सपोर्ट में 126 यूनिट खपत का दावा। जानिए पूरा मामला।

On: Friday, October 30, 2026 11:04 PM
Bihar Smart Meter

Bihar Smart Meter: बिहार में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानी एक बार फिर चर्चा में है। दक्षिण बिहार बिजली वितरण कंपनी (SBPDCL) के स्मार्ट मीटर और मोबाइल ऐप में दिखाई जा रही बिजली खपत के आंकड़ों को लेकर एक उपभोक्ता ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता का दावा है कि वह महीने में 125 यूनिट से भी कम बिजली इस्तेमाल कर रहा है, इसके बावजूद उसके स्मार्ट मीटर अकाउंट से लगातार पैसे कट रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि जब उपभोक्ता ने अपनी शिकायत लेकर कस्टमर सपोर्ट से संपर्क किया और जनवरी से अक्टूबर तक की बिजली खपत का हिसाब मांगा, तो मोबाइल ऐप में दिख रहे आंकड़ों और कस्टमर सपोर्ट द्वारा बताए गए आंकड़ों में अंतर सामने आया।

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब दोनों आंकड़े बिजली विभाग के ही सिस्टम से आ रहे हैं, तो आखिर सही आंकड़ा कौन-सा है?

125 यूनिट से कम बिजली इस्तेमाल, फिर भी कट रहा बैलेंस

उपभोक्ता के मुताबिक, वह लगातार बिहार बिजली स्मार्ट मीटर ऐप के माध्यम से अपनी बिजली खपत और अकाउंट बैलेंस की निगरानी कर रहा था। ऐप पर दिखाई जा रही जानकारी के अनुसार उसकी मासिक बिजली खपत 125 यूनिट से कम थी। इसके बावजूद उसके स्मार्ट मीटर अकाउंट से लगातार पैसे कट रहे थे।

उपभोक्ता को इस बात पर संदेह हुआ कि जब उसकी खपत निर्धारित सीमा से कम है, तो फिर बिजली बैलेंस में लगातार कटौती क्यों हो रही है?  इसी सवाल का जवाब जानने के लिए उसने SBPDCL के कस्टमर सपोर्ट से संपर्क किया।

जनवरी से अक्टूबर तक का मांगा बिजली खपत का हिसाब

उपभोक्ता ने कस्टमर सपोर्ट से जनवरी से अक्टूबर तक हर महीने की बिजली खपत का पूरा विवरण मांगा, ताकि मोबाइल ऐप में दिखाई जा रही यूनिट और विभाग के रिकॉर्ड का मिलान किया जा सके।

शुरुआत में जनवरी से अप्रैल तक के आंकड़े मोबाइल ऐप और कस्टमर सपोर्ट द्वारा बताए गए विवरण से मेल खाते दिखाई दिए। लेकिन मई से अक्टूबर के बीच स्थिति बदल गई।

उपभोक्ता का कहना है कि मई से अक्टूबर तक मोबाइल ऐप में दिखाई जा रही बिजली खपत और कस्टमर सपोर्ट द्वारा बताई गई यूनिट में अंतर मिला। यहीं से स्मार्ट मीटर के आंकड़ों की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होने लगे।

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ऐप में 113 यूनिट, कस्टमर सपोर्ट के रिकॉर्ड में 126 यूनिट!

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बिजली खपत के आंकड़ों में अंतर को लेकर है। उपभोक्ता के अनुसार, मोबाइल ऐप में उसकी बिजली खपत 113 यूनिट दिखाई जा रही है, जबकि कस्टमर सपोर्ट की ओर से उसी अवधि की खपत 126 यूनिट बताई गई।

अब सवाल है कि एक ही उपभोक्ता की बिजली खपत के दो अलग-अलग आंकड़े कैसे हो सकते हैं? जब मोबाइल ऐप और कस्टमर सपोर्ट दोनों बिजली विभाग के ही सिस्टम से जुड़े हैं, तो उनके रिकॉर्ड में अंतर क्यों दिखाई दे रहा है?

अगर उपभोक्ता ने वास्तव में 113 यूनिट बिजली इस्तेमाल की है, तो विभाग के रिकॉर्ड में 126 यूनिट कैसे दर्ज हुई? और यदि 126 यूनिट सही हैं, तो मोबाइल ऐप में 113 यूनिट क्यों दिखाई जा रही हैं? उपभोक्ता इसी अंतर का स्पष्ट जवाब मांग रहा है।

Bihar Smart Meter से पैसे कटने का पूरा हिसाब क्यों नहीं मिल रहा?

स्मार्ट मीटर का उद्देश्य बिजली खपत की सटीक जानकारी देना और उपभोक्ताओं को पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था उपलब्ध कराना है। लेकिन जब उपभोक्ता को अपने ही बिजली कनेक्शन की खपत के अलग-अलग आंकड़े मिलें, तो उसके लिए बिजली बिल और बैलेंस कटौती को समझना मुश्किल हो जाता है।

इस मामले में बिजली विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि:

  1. मोबाइल ऐप में दिखाई जा रही यूनिट किस अवधि की हैं?
  2. कस्टमर सपोर्ट द्वारा बताई गई यूनिट किस अवधि के आधार पर निकाली गई हैं?
  3. मई से अक्टूबर के बीच दोनों आंकड़ों में अंतर क्यों आया?
  4. स्मार्ट मीटर से पैसे कटने का पूरा विवरण उपभोक्ता को कैसे मिलेगा?
  5. अगर ऐप में गलत खपत दिखाई जा रही है, तो उसे ठीक करने की जिम्मेदारी किसकी है?

क्या 125 यूनिट से कम खपत पर भी पैसे कट सकते हैं?

बिहार में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली की व्यवस्था को लेकर लोगों के बीच काफी चर्चा है। लेकिन किसी उपभोक्ता के खाते से पैसे कटने या नहीं कटने का निर्धारण केवल ऐप में दिखाई जा रही मासिक यूनिट से नहीं किया जा सकता। इसके लिए कनेक्शन की पात्रता, योजना लागू होने की अवधि, बिलिंग साइकिल, पुराने बकाये और अन्य समायोजन का विवरण भी देखना जरूरी है।

इसलिए बिजली विभाग को उपभोक्ता के सामने पूरा हिसाब रखना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पैसे किस मद में काटे जा रहे हैं।

SBPDCL को देना चाहिए स्पष्ट जवाब

यह मामला केवल एक उपभोक्ता की शिकायत तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अगर ऐप और कस्टमर सपोर्ट के आंकड़ों में वास्तव में अंतर है, तो बिजली विभाग को इसकी तकनीकी जांच करानी चाहिए। उपभोक्ता को महीनेवार मीटर रीडिंग, यूनिट खपत, बैलेंस कटौती और भुगतान का पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ऐप में दिख रहे आंकड़े वास्तविक मीटर रीडिंग पर आधारित हैं या उनमें अपडेट होने में किसी तरह की देरी हो रही है। फिलहाल इस मामले में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उपभोक्ता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बिजली विभाग का अपना ऐप 113 यूनिट खपत दिखा रहा है और कस्टमर सपोर्ट 126 यूनिट बता रहा है, तो उपभोक्ता आखिर किस आंकड़े पर भरोसा करे?

बिहार के बिजली उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के नाम पर सिर्फ डिजिटल सुविधा नहीं, बल्कि सही आंकड़े और पारदर्शी हिसाब भी मिलना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. बिहार में स्मार्ट मीटर से पैसे क्यों कट रहे हैं?

स्मार्ट मीटर में पैसे कटने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे बिजली की खपत, पुराने बकाये, लागू शुल्क और बिलिंग समायोजन। सही कारण जानने के लिए उपभोक्ता को अपना पूरा बिजली खाता देखना चाहिए।

2. SBPDCL स्मार्ट मीटर की यूनिट कैसे चेक करें?

उपभोक्ता बिहार बिजली स्मार्ट मीटर ऐप में लॉगिन करके अपनी बिजली खपत, बैलेंस और उपलब्ध बिलिंग विवरण देख सकते हैं।

3. बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ किसे मिलता है?

बिहार सरकार की निर्धारित पात्रता और नियमों के अनुसार घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ दिया जाता है।

4. स्मार्ट मीटर ऐप और कस्टमर सपोर्ट के आंकड़ों में अंतर क्यों है?

इसके पीछे डेटा अपडेट होने में देरी, अलग-अलग बिलिंग अवधि या मीटर रीडिंग में अंतर जैसे कारण हो सकते हैं। वास्तविक कारण की पुष्टि बिजली विभाग ही कर सकता है।

5. स्मार्ट मीटर की गलत रीडिंग की शिकायत कहां करें?

उपभोक्ता SBPDCL के आधिकारिक कस्टमर सपोर्ट या बिजली शिकायत सेवा के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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