Holi 2026: रंगों के त्योहार होली की सुबह जैसे ही करीब आई, राजधानी पटना का मिज़ाज बदल गया। गुलाल और पिचकारी से पहले लोगों का रुख सीधे मटन और चिकेन की दुकानों की ओर था। सुबह 5 बजे से ही कई इलाकों में थैले लेकर लोग कतार में खड़े नजर आए, मानो जश्न की तैयारी रसोई से शुरू हो रही हो। इनकम टैक्स चौराहा और एग्जिबिशन रोड जैसे व्यस्त इलाकों में खरीददारों की भीड़ इतनी बढ़ी कि दुकानों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। त्योहार का उत्साह साफ झलक रहा था—हर कोई चाहता था कि उसके घर की दावत में कोई कमी न रह जाए।
होली (Holi 2026) के दिन बिहार में खास तौर पर मटन और चिकेन की मांग परंपरागत रूप से ज्यादा रहती है। कई परिवारों में रंग खेलने के बाद खास पकवान बनाने की परंपरा है। इसी पृष्ठभूमि में इस बार भी बाजारों में असाधारण भीड़ देखने को मिली। हालांकि, कुछ खरीददारों ने माना कि इतनी भीड़ और अफरातफरी की उम्मीद नहीं थी। त्योहार की रौनक और उमंग के बीच ‘मीट बाजार’ की यह हलचल एक अलग ही तस्वीर पेश कर रही थी।
Holi 2026: दाम दोगुने, सड़कें जाम और गाइडलाइन गायब
मांग बढ़ते ही कुछ दुकानदारों ने मौके का फायदा उठाते हुए कीमतों में इजाफा कर दिया। पॉश इलाकों में बकरे के मीट की कीमतें अचानक बढ़ने की चर्चा रही। इनकम टैक्स चौराहे के आसपास मटन दोगुने दाम पर बिकने की बातें सामने आईं, जिससे कई ग्राहकों में नाराजगी भी दिखी। बोरिंग कैनाल रोड, शिवपुरी, कुम्हरार, भूतनाथ रोड, कंकड़बाग, डॉक्टर्स कॉलोनी और राजेंद्र ब्रिज के नीचे बाजारों में कार और बाइक की लंबी कतारों ने ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावित किया। सुबह 11 बजे तक कई जगहों पर जाम की स्थिति बनी रही और आम राहगीरों को खासी परेशानी उठानी पड़ी।
इस भीड़-भाड़ के बीच बर्ड फ्लू को लेकर जारी सावधानियां कहीं पीछे छूटती दिखीं। कई दुकानों पर न तो मास्क का उपयोग नजर आया और न ही स्वच्छता के पर्याप्त इंतजाम। चिकेन लेने की जल्दबाजी में लोग एहतियाती गाइडलाइन भूलते दिखे। विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहार के उत्साह के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। साफ-सफाई और सुरक्षित खरीदारी पर ध्यान देना बेहद अहम है, ताकि त्योहार का आनंद किसी जोखिम में न बदले।
खरीददारों की राय भी बंटी हुई दिखी। कुछ लोगों ने बढ़ती कीमतों पर नाराजगी जताई, तो कुछ ने इसे त्योहार की सामान्य रौनक बताया। एक ग्राहक ने कहा कि “भीड़ दिखाकर हमारे पर्व को बदनाम किया जा रहा है, असल में यह तो होली की खुशी है।” सच यही है कि पटना में होली का रंग सिर्फ गुलाल तक सीमित नहीं, बल्कि रसोई की महक और परिवार की दावत भी इस त्योहार की पहचान है। त्योहारों में बाजार की चहल-पहल नई बात नहीं, लेकिन प्रशासन और व्यापारियों के लिए यह जरूरी है कि कीमतों और व्यवस्था पर संतुलन बनाए रखें। ताकि रंगों का यह पर्व हर किसी के लिए खुशियां लेकर आए, न कि परेशानी।








