Bihar Politics: बिहार की राजनीति में दही-चूडा़ भोज की अपनी एक अलग अहमियत है. एक बार फिर जब नए साल पर मकर संक्रांति आई है तो दही चूडा़ भोज ने बिहार के राजनीति में एक नई खिचड़ी पकानी शुरू कर दी है. एक तरफ देखा जाए तो अपने परिवार से अलग होकर तेजप्रताप यादव बड़े-बड़े नेताओं को खुद जाकर दही चूडा़ भोज का निमंत्रण दे रहे हैं.
वहीं दूसरी ओर बिहार में कांग्रेस के जो 6 विधायक है, वह पार्टी के भोज से गायब रहे. भले पार्टी लाख दावा कर रही है कि सभी विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में मकर संक्रांति के भोज में व्यस्त है लेकिन अचानक सभी 6 विधायक का पार्टी के कार्यक्रम से गायब रहना, यह पार्टी में बहुत बड़ी टूट का संकेत दे रहा है. यही वजह है कि मकर संक्रांति के बाद बिहार में बहुत बड़ा खेला हो सकता है.
Bihar Politics: कांग्रेस में टूट के संकेत
बिहार चुनाव में कांग्रेस को अपने मन मुताबिक सीट नहीं मिलने के बाद राजद से मनमुटाव की खबरें जब जाहिर है. इसी बीच देखा जाए तो कांग्रेस के दही चूडा़ भोज से उसके सभी 6 विधायक गायब रहे हैं. भले ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम यह दावा कर रहे हैं कि सभी विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में व्यस्त है लेकिन कुछ समय पहले ही लोजपा विधायक और राज्य सरकार में मंत्री संजय कुमार सिंह ने यह दावा किया था कि कांग्रेस के सभी 6 विधायक एनडीए के संपर्क में है और मकर संक्रांति के बाद पाला बदल सकते हैं.
यही वजह है कि कांग्रेस में एक बहुत बड़ी टूट की खबर सामने आ रही है. अगर ऐसा होता है तो फिर बिहार से कांग्रेस का वजूद पूरी तरह से खत्म हो जाएगा. मकर संक्रांति के भोज के बाद कोई बड़ा खेल होना तो जग जाहिर है. मकर संक्रांति का दही चूडा़ भोज महज एक भोज नहीं बल्कि बिहार की सियासत का एक नया अध्याय भी माना जाता है.
पिता की राह पर चले तेज प्रताप
साल 2017 में जब लालू यादव ने दही चूडा़ भोज का आयोजन किया था तो इस आयोजन में शामिल होकर नीतीश कुमार ने महागठबंधन की ही सरकार गिरा दी थी. वही 2018 में वशिष्ठ नारायण सिंह ने दही चुरा भोज का आयोजन किया था तो उस भोज में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी शामिल हुए थे जिसके बाद वह जदयू में आ गए.
अब अपने पिता लालू प्रसाद यादव की तरह तेज प्रताप यादव को भी उसी राह पर चलते हुए देखा जा रहा है, जहां परिवार और पार्टी से अलग होने के बाद बिहार चुनाव के बाद से ही देखा जा रहा है कि एनडीए और भाजपा के कई नेताओं के साथ उनके नजदीकी बढ़ रही है जिसने बिहार के सियासत में एक नई चर्चा शुरू कर दी है.
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