Gopalganj Bridge Collapse: गोपालगंज में निर्माणाधीन पुल गिरा, 2.89 करोड़ की लागत वाला आरसीसी ढांचा ढलाई के दौरान ध्वस्त

Gopalganj Bridge Collapse: सुबह का वक्त था और गांव के लोग रोज़ की तरह अपने काम में लगे थे, तभी ... Read more

On: Wednesday, March 4, 2026 5:11 PM
Gopalganj Bridge Collapse

Gopalganj Bridge Collapse: सुबह का वक्त था और गांव के लोग रोज़ की तरह अपने काम में लगे थे, तभी अचानक तेज धमाके जैसी आवाज ने सबको चौंका दिया। सिधवलिया प्रखंड के गंगवा गांव में घोघारी नदी पर बन रहा निर्माणाधीन आरसीसी पुल ढलाई के दौरान ही भरभराकर गिर पड़ा। करीब 29 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण लगभग 2 करोड़ 89 लाख 21 हजार रुपये की लागत से किया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, स्लैब की ढलाई चल रही थी कि अचानक पूरा ढांचा ताश के पत्तों की तरह जमीन पर आ गिरा। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद मजदूर सुरक्षित बच गए और कोई जनहानि नहीं हुई।

यह पुल ग्रामीणों के लिए सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि आने-जाने की जीवनरेखा था। बरसात के दिनों में घोघारी नदी उफान पर रहती है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और किसानों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में इस पुल से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी। लेकिन हादसे ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Gopalganj Bridge Collapse: गुणवत्ता पर सवाल, जांच के घेरे में संवेदक और अभियंता

पुल गिरते ही गांव में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लगाए। लोगों का कहना है कि सीमेंट और बालू के मिश्रण में मानकों की अनदेखी की गई। निर्धारित मोटाई की जगह कमजोर सरिया का उपयोग किया गया और सेंटरिंग व सपोर्ट सिस्टम भी वजन सहन नहीं कर सका। कुछ ग्रामीणों ने इसे सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और लापरवाही का नतीजा बताया।

घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत निर्माण कार्य रोक दिया। जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि पुल का निर्माण बापूधाम कंस्ट्रक्शन, मोतिहारी के संवेदक बबलू कुमार के जिम्मे था। निरीक्षण के दौरान जेई, एई और कार्यपालक अभियंता की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। प्रारंभिक जांच में जमीन का समुचित कॉम्पैक्शन नहीं होना और जंग लगे आयरन बेस के इस्तेमाल की बात सामने आई है। विशेषज्ञों ने सेंटरिंग की क्षमता और तकनीकी निगरानी की कमी को भी हादसे की बड़ी वजह माना है।

निर्माण गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल

डीएम ने तीनों अभियंताओं—कार्यपालक, सहायक और कनीय अभियंता—के निलंबन की अनुशंसा की है और संवेदक को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। आरडब्ल्यूडी सचिव को विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई है तथा सीमेंट और लोहे के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में बिहार में पुल गिरने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे निर्माण गुणवत्ता और निगरानी तंत्र पर लगातार प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और पुल का पुनर्निर्माण पारदर्शिता व गुणवत्ता मानकों के साथ जल्द शुरू किया जाए, ताकि विकास कार्यों पर जनता का भरोसा फिर से कायम हो सके।

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