Makar Sakranti: बिहार के राजनीति में दही- चूडा़ का भोज काफी मायने रखता है. अक्सर ये देखा जाता है कि मकर संक्रांति के बाद सरकार तक गिर जाती है. कई बार यह देखा गया कि जिसके यहां भोज का आयोजन होता है, वही सत्ता से बाहर हो जाते हैं. इसलिए इसे बिहार की राजनीति का भविष्य भी कहा जाता है.
खास है 2026 की Makar Sakranti
साल 2026 की मकर संक्रांति काफी खास है. एक तरफ देखा जाए तो राष्ट्रीय जनता दल में जिस तरह से अंदरूनी सियासत चल रही है और पारिवारिक कलह के कारण तेज प्रताप यादव अब परिवार और पार्टी दोनों से अलग हो गए हैं. इस बार तेज प्रताप यादव दही चुरा का भोज दे रहे हैं, जो इससे पहले लालू प्रसाद यादव द्वारा आयोजित किया जाता था. सबसे खास बात यह है कि तेज प्रताप ने अपने इस भोज में बीजेपी,जदयू और राजद के कई बड़े नेताओं को निमंत्रण दिया है.
यही वजह है कि इस बार मकर संक्रांति में बिहार की सियासत की खिचड़ी पक सकती है. परिवार और पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के बीच तेज प्रताप यादव का सभी दलों को निमंत्रण देना यह संकेत देता है कि वह टकराव से ज्यादा संवाद की राजनीति को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं.
मकर संक्रांति बाद गिर जाती है सरकारें
बिहार के सियासत में मकर संक्रांति काफी अहमियत रखता है क्योंकि कई बार इस भोज के बाद सरकार तक गिर जाती है. कहा जाता है कि स्वादिष्ट चूड़ा, दही और तिलकुट खाकर नेताओं के मन बदलने लगते हैं. वहीं कई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसलों पर भी मोहर लग जाती है. हम आपको अगर इस दही चुरा वाली राजनीति के बारे में बता दे तो पिछले साल यानी 2024 की बात करते हैं, जब सीएम नीतीश दही चूड़ा खाने राबड़ी आवास पहुंचे.
उस वक्त जदयू और राजद के बीच चल रही तनातनी ने एक अलग रूप ले लिया, जहां अगले ही दिन नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद के घर जाकर चूड़ा दही तो खाया लेकिन 28 जनवरी को उनका साथ छोड़ दिया और फिर भाजपा के साथ जाकर सरकार बना ली.
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