Maner Diyara Erosion: पटना जिले के मनेर प्रखंड अंतर्गत हल्दी छपरा संगम के समीप दियारा क्षेत्र में गंगा नदी का कटाव एक बार फिर भयावह रूप लेता जा रहा है। उपजाऊ जमीन और लोगों के आशियाने नदी में समाते जा रहे हैं, जिससे हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी और जीवन दोनों का संकट खड़ा हो गया है। इसी गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय ग्रामीणों के साथ विधायक भाई वीरेंद्र, नगर परिषद सभापति और मुखिया धरना पर बैठ गए हैं।
धरने के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ज्वलंत समस्या की ओर आकृष्ट करने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में हालात और भी बदतर हो सकते हैं।
Maner Diyara Erosion: विधायक भाई वीरेंद्र का सरकार से सवाल, कब रुकेगा दियारा का विनाश?
धरना स्थल पर मौजूद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि मनेर दियारा क्षेत्र में कटाव कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन हर साल इसकी भयावहता बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि कटाव के कारण आए दिन किसानों की उपजाऊ जमीन और लोगों के घर गंगा नदी में विलीन हो रहे हैं। इससे न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि हजारों परिवारों की जान भी हमेशा खतरे में बनी रहती है।
विधायक ने कहा कि राज्य सरकार फोरलेन और सिक्स लेन सड़कों के निर्माण के साथ कई इलाकों का कायाकल्प कर रही है, जो सराहनीय है। लेकिन उसी गंभीरता से मनेर दियारा क्षेत्र को भी मॉडल के रूप में विकसित करने की जरूरत है। कटाव रोकने के लिए यदि स्थायी और प्रभावी योजना लागू नहीं की गई, तो ग्रेटर पटना की परिकल्पना अधूरी रह जाएगी।
दियारा बचेगा तभी ग्रेटर पटना का भविष्य सुरक्षित होगा
धरने के दौरान विधायक भाई वीरेंद्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दियारा क्षेत्र को बचाना केवल स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे ग्रेटर पटना के विकास से जुड़ा हुआ सवाल है। उन्होंने कहा कि यदि दियारा ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो ग्रेटर पटना का कोई वास्तविक मतलब नहीं रह जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि मनेर दियारा इलाके में कटाव निरोधक कार्यों को प्राथमिकता दी जाए और इसे एक मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया जाए, ताकि भविष्य में लोगों को इस तरह की आपदा का सामना न करना पड़े।
स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण भी धरने में रहे शामिल
इस धरने में नगर परिषद सभापति विद्याधर विनोद, मुखिया अशोक राय, लालकिशोर राय, अभिषेक कुमार, शैलेश कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कटाव रोकने के लिए स्थायी समाधान की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ और कटाव के समय उन्हें अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ता है। सरकार से कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस और दीर्घकालिक समाधान नहीं निकल पाया है। इसी कारण मजबूर होकर जनप्रतिनिधियों के साथ धरना करना पड़ा।
कटाव से प्रभावित हजारों परिवारों की बढ़ती चिंता
मनेर दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए कटाव अब केवल प्राकृतिक समस्या नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे बड़ा डर बन चुका है। खेत, घर और सड़कें धीरे-धीरे नदी में समाती जा रही हैं। इससे शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सरकार समय रहते कटाव निरोधक कार्यों को तेज नहीं करती, तो आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर विस्थापन की स्थिति पैदा हो सकती है।
सरकार से प्रभावी और स्थायी समाधान की मांग
धरने के माध्यम से जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सरकार से अपील की है कि मनेर दियारा के कटाव को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसमें तटबंध निर्माण, आधुनिक तकनीक का उपयोग और दीर्घकालिक योजना शामिल होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि दियारा को बचाना सिर्फ एक इलाके को बचाना नहीं, बल्कि पटना और आसपास के क्षेत्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है। अब देखना होगा कि सरकार इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती है।
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