Rabri Awas: आधी रात खाली होने लगा राबड़ी आवास, लालू-तेजस्वी की गैरमौजूदगी में बढ़ी सियासी हलचल

On: Friday, December 26, 2025 8:32 AM
Rabri Awas

Rabri Awas: से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास में 25 दिसंबर की आधी रात अचानक हलचल देखने को मिली। जानकारी के मुताबिक देर रात 4 से 5 छोटी गाड़ियां आवास परिसर से बाहर निकलीं, जिनमें घरेलू सामान लदा हुआ था। इस दौरान न तो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पटना में मौजूद थे और न ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव। बताया जा रहा है कि उस वक्त आवास में केवल राबड़ी देवी मौजूद थीं।

Rabri Awas: गोला रोड गौशाला में शिफ्ट किया गया सामान

सूत्रों के अनुसार, आधी रात में राबड़ी आवास से निकाला गया सामान गोला रोड स्थित गौशाला में अस्थायी रूप से रखा गया है। सामने आई तस्वीरों में आवास के गार्डन से जुड़े पौधे और अन्य सामान हटाते हुए देखा गया। हालांकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ओर से इस शिफ्टिंग को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है, लेकिन रात के अंधेरे में हुई इस गतिविधि ने सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है।

एक महीने पहले मिला था खाली करने का नोटिस

गौरतलब है कि 25 नवंबर को भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी आवास खाली करने को लेकर नोटिस जारी किया था। नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को खाली किया जाए। इसके बदले बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के लिए हार्डिंग रोड स्थित आवास संख्या-39 आवंटित किया गया है। लालू परिवार पिछले करीब 20 वर्षों से इस आवास में रह रहा था।

चरणबद्ध तरीके से खाली होगा Rabri Awas

राजद की ओर से पहले दावा किया गया था कि राबड़ी आवास खाली नहीं किया जाएगा, लेकिन अब नोटिस के करीब एक महीने बाद खाली करने की प्रक्रिया शुरू होती नजर आ रही है। सूत्रों का कहना है कि आवास को चरणबद्ध तरीके से खाली किया जाएगा। फिलहाल सामान गोला रोड में रखा गया है, जिसके बाद उसे महुआ बाग और आर्य समाज रोड स्थित आवासों में शिफ्ट किया जाएगा।

Rabri Awas का ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व

10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास बिहार की राजनीति का एक अहम केंद्र रहा है। वर्ष 1997 में चारा घोटाले के बाद लालू यादव के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के पश्चात राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनी थीं। वर्ष 2005 में यह सरकारी आवास उन्हें आवंटित किया गया था, जो पिछले दो दशकों तक राजद की राजनीतिक गतिविधियों और रणनीतियों का मुख्य केंद्र बना रहा। अब इस आवास के खाली होने के साथ ही बिहार की राजनीति का एक लंबा अध्याय समाप्त होने की चर्चा तेज हो गई है।

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