Nitish Kumar: बिहार में एक बार फिर से एनडीए सरकार बन चुकी है जहां नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले चुके हैं. इन सब के बाद जब बिहार में मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा हुआ तो एक गजब का फेर बदल देखने को मिला. अपनी राजनीति में नीतीश कुमार जिन्होंने गृह मंत्रालय आज तक अपने पास रखा था, उन्होंने इस बार यह मंत्रालय भाजपा को सौंप दिया.
मंत्रालय के बंटवारे में मुख्यमंत्री ने यह विभाग उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी को सौंपा है. यानी कि बिहार विधानसभा चुनाव में 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा अब बिहार के कानून व्यवस्था की नीति में सीधे रूप से नेतृत्वकारी भूमिका अदा करेगी लेकिन सबसे बड़ा सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है कि आखिर वह क्या वजह रही होगी जिस कारण नीतीश कुमार ने यह फैसला लिया.
इस वजह से Nitish Kumar ने त्याग दिया गृह विभाग
बिहार की सत्ता में नीतीश कुमार जब से है तब से यह देखा जा रहा है कि उन्होंने सामान्य प्रशासन, विजिलेंस, कैबिनेट सचिवालय और निर्वाचन जैसे अपने पारंपरिक विभाग को हमेशा अपने पास रखा लेकिन इस बात को भी कोई नकार नहीं सकता कि 2025 चुनाव के बाद भाजपा एक सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और एनडीए की सरकार में स्थिरता बनाए रखने के लिए शायद नीतीश कुमार को यह मॉडल अपनाना पड़ा.
इसके अलावा एक यह भी कारण है कि नीतीश कुमार कई बार पाला बदलने की छवि के रूप में जाने जाते हैं. यही वजह है कि भाजपा उनके साथ एक ऐसी साझेदारी चाहती थी जिससे पार्टी को मजबूती मिले. यही वजह है कि भाजपा ने गृह विभाग नीतीश कुमार से मांगा.
नीतीश कुमार ने लिया बड़ा फैसला
नीतीश कुमार इस वक्त 73 साल के हो चुके हैं. यही वजह है कि लगातार प्रशासनिक फोकस करना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है, तभी तो 2005 में सत्ता संभालने के बाद जिस गृह विभाग को उन्होने कभी किसी को नहीं दिया, उसे भाजपा के साथ साझा कर दिया. यह विभागीय बदलाव सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि आने वाले समय की राजनीति स्थिरता और सत्ता संतुलन पर भी काफी प्रभाव डालेगी.
गृह विभाग हासिल करने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा है कि “वह नीतीश कुमार द्वारा जमीन पर किए गए कार्यों को आगे बढ़ाएंगे और बिहार में सुशासन को और भी मजबूत करने की कोशिश करेंगे”.
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