UGC Bill; UGC Equality Regulations 2026: यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने पूरे देश में नए नियम लागू किए हैं जिसके मकसद कॉलेज और विश्वविद्यालय में जातिगत भेदभाव को खत्म करना और सभी छात्रों को एक समान मौका देना है. इसका विरोध इसलिए किया जा रहा है क्योंकि कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि इससे शिक्षा के गुणवत्ता पर असर पड़ेगा.
साथ ही साथ कॉलेज और यूनिवर्सिटी पर भी बेवजह दबाव दिखेगा. एक तरफ देखा जाए तो सामाजिक न्याय की दिशा में इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है. वही देश के कई हिस्सों में इसका तीखा विरोध भी शुरू हो गया है.
UGC Bill को लेकर हो रहा भारी विरोध
इसका विरोध करने के पीछे एक सबसे बड़ा कारण यह भी है कि कुछ कॉलेज का मानना है कि इस नियम के बहाने सरकार यूनिवर्सिटी के काम करने के तरीके में दखल दे रही है. सरकार ने यह भी आदेश दिया है कि जो कॉलेज इन बातों को नहीं मानेगा, यूजीसी उनकी सरकारी मदद रोक सकता है. उत्तर प्रदेश में 2027 में चुनाव होने हैं जिससे पहले अब इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग बदलना शुरू कर दिया है.
यूजीसी के नए कानून में क्या-क्या बदला?
अभी तक उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतें मुख्य रूप से एससी और एसटी समुदाय तक सीमित थी लेकिन नए रेगुलेशन के तहत अब ओबीसी को भी जातिगत भेदभाव की श्रेणी में शामिल कर लिया गया. यानी कि अब नए नियम के तहत हर कॉलेज यूनिवर्सिटी में एससी, एसटी और ओबीसी के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ बनाना बिल्कुल जरूरी होगा. साथ ही साथ यूनिवर्सिटी लेवल पर एक सामान्य समिति गठित की जाएगी जिसमें ओबीसी, महिला, एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों की मौजूदगी जरूरी है. समिति हर 6 महीने में रिपोर्ट तैयार कर यूजीसी को भेजेगा.
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