Bihar News: बिहार में सख्त एक्शन, भ्रामक बयान देने वाले 3 अंचल अधिकारी सस्पेंड

बिहार में 3 अंचल अधिकारी निलंबित, भ्रामक बयान और हड़ताल पर सरकार सख्त। जानें पूरा मामला और सरकार का बड़ा फैसला।

On: Wednesday, March 18, 2026 11:03 PM
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Bihar News: बिहार में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल के बीच सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मीडिया में गलत और भ्रामक बयान देने वाले तीन अंचल अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब एक तरफ हड़ताल जारी है और दूसरी तरफ सरकार कामकाज को पटरी पर बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

Bihar News: भ्रामक बयान पर सरकार सख्त, आधे से ज्यादा अधिकारी काम पर

सरकार का कहना है कि जमीनी हकीकत कुछ और है और जो तस्वीर मीडिया में पेश की जा रही है, वह पूरी तरह सही नहीं है। उपमुख्यमंत्री के मुताबिक, जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 50 फीसदी से अधिक राजस्व अधिकारी काम कर रहे हैं। इसके बावजूद कुछ अधिकारियों द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि सभी कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे आम जनता में भ्रम फैल रहा था। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए साफ संदेश दिया है कि गलत जानकारी फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है।

किन अधिकारियों पर कार्रवाई और क्या है पूरा मामला

इस कार्रवाई के तहत अररिया के पूर्व अंचल अधिकारी जितेंद्र पांडेय, सदर अंचल अधिकारी रजनीकांत और पूर्वी चंपारण में तैनात अंचल अधिकारी आनंद कुमार को निलंबित किया गया है। सरकार के अनुसार इन अधिकारियों के खिलाफ पहले से भी कई शिकायतें मिल रही थीं और अब उनके बयानों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया। यही वजह है कि सिर्फ निलंबन ही नहीं, बल्कि इनके कार्यों और आचरण की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे।

हड़ताल के इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि भी अहम है। पिछले कुछ समय से राजस्व विभाग के अधिकारी अपनी मांगों को लेकर विरोध जता रहे हैं, जिससे जमीन से जुड़े काम, दाखिल-खारिज और अन्य जरूरी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में सरकार पर दबाव भी बढ़ रहा है कि वह एक तरफ कर्मचारियों की समस्याएं सुने और दूसरी तरफ आम जनता को परेशानी से बचाए।

हड़ताल, इस्तीफा और सरकारी काम में बाधा पर कड़ा संदेश

सरकार ने हड़ताल पर गए अधिकारियों को अंतिम चेतावनी दी है कि वे वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले काम पर लौट आएं, अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, जो अधिकारी छुट्टी के नाम पर हड़ताल में शामिल हैं, उनकी भी जांच की जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ अधिकारियों के इस्तीफे के बाद दिए गए बयानों को भी सरकार गंभीरता से ले रही है। इसके लिए महेंद्र पाल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसमें मोना झा और नवाजिश को शामिल किया गया है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस समय जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य चल रहे हैं और ऐसे में किसी भी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि काम करने वालों की समस्याओं का समाधान जरूर होगा, लेकिन दबाव की राजनीति या अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है।

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