Sonpur Hospital: कभी-कभी एक घटना सिर्फ खबर नहीं होती, बल्कि पूरे सिस्टम का आईना बन जाती है। बिहार के सोनपुर अनुमंडलीय अस्पताल में जो हुआ, उसने स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ इंसानियत पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। प्रसव पीड़ा से कराहती एक गर्भवती महिला अस्पताल पहुंची थी, उम्मीद थी कि डॉक्टर और नर्स उसकी मदद करेंगे, लेकिन आरोप है कि उसे कथित तौर पर HIV पॉजिटिव बताकर इलाज से ही इनकार कर दिया गया।
दर्द से तड़पती महिला अस्पताल (Sonpur Hospital) के फर्श पर पड़ी रही, जबकि उसके परिजन मदद की गुहार लगाते रहे। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को झकझोर देने वाला था — क्योंकि अस्पताल, जहां जीवन बचाया जाता है, वहीं एक मां इलाज के इंतजार में असहाय नजर आई।
Sonpur Hospital: HIV रिपोर्ट के नाम पर रुकी इंसानियत
मामला सोनपुर के अनुमंडलीय अस्पताल (Sonpur Hospital) का है, जहां नयागांव थाना क्षेत्र की रहने वाली गर्भवती महिला को मंगलवार को तेज प्रसव पीड़ा के बाद भर्ती कराने लाया गया। परिजनों के अनुसार, महिला पहले भी जांच के लिए अस्पताल आती रही थी, इसलिए उन्हें भरोसा था कि यहां सुरक्षित प्रसव हो जाएगा। लेकिन आरोप है कि जांच के बाद अस्पताल कर्मियों ने महिला को HIV पॉजिटिव बताते हुए डिलीवरी कराने से मना कर दिया। यह सुनते ही परिवार के लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, महिला दर्द से कराहती रही, मगर स्वास्थ्यकर्मी उसके पास जाने से हिचकिचाते रहे। अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने बताया कि उस समय हालात बेहद संवेदनशील थे — एक तरफ प्रसव पीड़ा से जूझती महिला और दूसरी तरफ डर और भ्रम में खड़े स्वास्थ्यकर्मी। भारत में HIV को लेकर जागरूकता बढ़ने के बावजूद आज भी कई जगहों पर डर और गलतफहमी देखने को मिलती है। जबकि चिकित्सा प्रोटोकॉल साफ कहता है कि उचित सुरक्षा उपायों के साथ HIV संक्रमित मरीज का इलाज पूरी तरह सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है।
आखिरकार महिलाओं ने दिखाई हिम्मत, जन्मी बच्ची
स्थिति तब और बिगड़ गई जब अस्पताल (Sonpur Hospital) में भीड़ जुटने लगी और परिजनों का आक्रोश बढ़ गया। इसी बीच आशा और ममता कार्यकर्ताओं के साथ परिवार की कुछ महिलाओं ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने इंतजार करने के बजाय खुद पहल की और प्रसूता को अंदर ले जाकर प्रसव कराने में मदद की। कुछ समय बाद महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। इस पल ने वहां मौजूद लोगों को राहत तो दी, लेकिन साथ ही कई सवाल भी छोड़ दिए — क्या एक मां को सुरक्षित प्रसव के लिए इतनी पीड़ा और अपमान सहना जरूरी था?
यह घटना ग्रामीण और गरीब परिवारों की उस मजबूरी को भी उजागर करती है, जहां निजी अस्पतालों का खर्च उठाना संभव नहीं होता और सरकारी अस्पताल ही अंतिम उम्मीद बन जाते हैं।
बाद की जांच में खुला सच, रिपोर्ट पर उठे सवाल
घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया, जब बाद में निजी लैब में कराई गई जांच में महिला HIV पॉजिटिव नहीं पाई गई। यानी शुरुआती रिपोर्ट ही गलत निकली या उसकी सही पुष्टि नहीं की गई थी। इस खुलासे के बाद अस्पताल (Sonpur Hospital) प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे। अगर रिपोर्ट की पुष्टि किए बिना इलाज रोका गया, तो यह न सिर्फ लापरवाही बल्कि मरीज के अधिकारों का उल्लंघन भी माना जा सकता है। महिला पहले से दो बच्चों की मां है और आर्थिक तंगी के कारण सरकारी अस्पताल पर ही निर्भर थी। उसके पति बाहर मजदूरी करते हैं, इसलिए परिवार के पास निजी इलाज का विकल्प नहीं था।
प्रशासन की सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
मामले के तूल पकड़ने के बाद अस्पताल (Sonpur Hospital) प्रशासन ने स्वीकार किया कि महिला HIV पॉजिटिव नहीं थी और उसके साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पूनम सिंह ने संबंधित कर्मियों को फटकार लगाने की बात कही है। सरकार द्वारा HIV मरीजों के लिए अलग वार्ड, सुरक्षा किट और विशेष चिकित्सा प्रोटोकॉल पहले से लागू हैं। इसके बावजूद अगर डर या जानकारी की कमी के कारण इलाज रोका जाता है, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है। यह घटना सिर्फ एक अस्पताल की नहीं, बल्कि उस मानसिकता की भी कहानी है, जहां बीमारी से ज्यादा डर और सामाजिक कलंक हावी हो जाता है।
एक घटना, कई सबक
Sonpur Hospital की यह घटना हमें याद दिलाती है कि चिकित्सा सेवा केवल इलाज नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और मानवता का भी नाम है। अस्पताल में आने वाला हर मरीज भरोसा लेकर आता है — और उस भरोसे को टूटने नहीं देना ही असली जिम्मेदारी है। जरूरत है कि स्वास्थ्यकर्मियों को नियमित प्रशिक्षण, सही जानकारी और संवेदनशील व्यवहार की शिक्षा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई मां इलाज के इंतजार में फर्श पर तड़पने को मजबूर न हो।
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