Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Election 2025) के दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान रोहतास जिले से लोकतंत्र की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। 95 वर्षीय रामचेला यादव, जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं, उन्होंने खाट पर लेटकर मतदान केंद्र तक पहुंचकर वोट डाला। उनका यह समर्पण और उत्साह देखकर पूरा मतदान केंद्र भावुक हो उठा। यह घटना रोहतास जिले के करगहर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम वसुंधरा की है, जहां से लोकतंत्र के इस सच्चे पर्व का सबसे प्रेरक दृश्य सामने आया।
Bihar Election 2025: खाट पर लेटकर पहुंचे मतदान केंद्र तक
उम्र और कमजोरी के कारण रामचेला यादव अब चलने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन मतदान को लेकर उनकी इच्छा इतनी प्रबल थी कि उन्होंने अपने परिवार से कहा — “मैं इस बार भी वोट जरूर डालूंगा, चाहे कैसे भी ले चलो।” परिवार वालों ने उन्हें खाट पर लिटाकर मतदान केंद्र तक पहुंचाया। जैसे ही यह दृश्य वहां मौजूद लोगों ने देखा, सभी के चेहरे पर गर्व और भावुकता झलकने लगी। कई लोगों ने इस पल को मोबाइल में कैद किया और कुछ ही घंटों में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर, लोगों ने कहा – सच्चे मतदाता की पहचान
रामचेला यादव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छा गई हैं। लोग उन्हें लोकतंत्र का “सच्चा प्रहरी” बता रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा — “जब 95 साल के रामचेला यादव वोट डालने जा सकते हैं, तो युवाओं के पास कोई बहाना नहीं होना चाहिए।” उनका यह कदम युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश बन गया है कि वोट सिर्फ अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है।
गांव में चर्चा का विषय बने रामचेला यादव
मतदान केंद्र से लौटने के बाद ग्राम वसुंधरा और आसपास के क्षेत्रों में रामचेला यादव की चर्चा जोरों पर है। गांव के लोग उनके जज्बे की तारीफ करते नहीं थक रहे। ग्रामीणों ने कहा कि उनके इस कदम ने युवाओं के बीच मतदान को लेकर एक नई सोच पैदा की है। “जब 95 साल की उम्र में कोई व्यक्ति खाट पर लेटकर भी वोट डाल सकता है, तो युवाओं को घर में नहीं बैठना चाहिए।”
बढ़ा मतदान प्रतिशत, जनता में उत्साह चरम पर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में लोगों में भारी जोश देखने को मिला। निर्वाचन आयोग के मुताबिक दोपहर 3 बजे तक 60.40 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था और देर शाम तक यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना थी। इस बार महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जो लोकतंत्र के प्रति जागरूकता का संकेत है।
लोकतंत्र का सच्चा पर्व, रामचेला यादव बने प्रेरणा
रामचेला यादव की यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं बल्कि लोकतंत्र की असली ताकत की पहचान है। उन्होंने यह साबित किया कि उम्र या शारीरिक कमजोरी, जिम्मेदारी निभाने में कभी बाधा नहीं बन सकती। उनका यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिक अपने अधिकारों का ईमानदारी से उपयोग करते हैं — और रामचेला यादव ने यही उदाहरण पेश किया।
रोहतास के 95 वर्षीय रामचेला यादव की यह कहानी पूरे बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश के मतदाताओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने साबित किया कि लोकतंत्र की सच्ची सेवा केवल भाषणों या नारों से नहीं, बल्कि मतदान की सक्रिय भागीदारी से होती है। “उम्र भले ही बढ़ जाए, लेकिन लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी कभी नहीं घटनी चाहिए।” रामचेला यादव जैसे मतदाता ही भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं।








