देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG एक बार फिर विवादों में आ गई है। इस बार मामला और भी गंभीर है क्योंकि री-एग्जाम के दौरान ही फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। बिहार के लखीसराय से सामने आई इस घटना ने पूरे देश को चौंका दिया है। यहां परीक्षा के दौरान एक संगठित सॉल्वर गैंग पकड़ा गया, जिसने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
रविवार को आयोजित NEET UG री-एग्जाम के दौरान पुलिस ने तीन अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें 7 सॉल्वर, 5 मेडिकल छात्र और 14 बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी शामिल हैं। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें परीक्षा की सुरक्षा से जुड़े लोग भी शामिल पाए गए हैं।
NEET UG : बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध लगाकर कैसे चल रहा था पूरा खेल?
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम में ही सेंध लगा दी थी। आमतौर पर परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन को सबसे सुरक्षित प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन इस गैंग ने उसी को कमजोर कड़ी बना दिया। गिरोह के सदस्य असली परीक्षार्थियों की जगह नकली उम्मीदवारों को बैठाने का काम कर रहे थे। इसके लिए बायोमेट्रिक कर्मचारियों की मदद ली गई, जिससे फर्जी अभ्यर्थियों को बिना किसी रुकावट के परीक्षा केंद्र में प्रवेश मिल गया।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस पूरे खेल के लिए मोटी रकम ली जाती थी। एक अभ्यर्थी की जगह सॉल्वर बैठाने के लिए करीब 30 लाख रुपये तक की डील की बात सामने आई है। इससे साफ है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक बड़ा संगठित नेटवर्क था।
मेडिकल छात्रों की संलिप्तता से उठे बड़े सवाल, जांच में क्या खुलासा?
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इसमें मेडिकल के छात्र भी शामिल पाए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में 5 मेडिकल छात्र शामिल हैं, जिनमें पीएमसीएच का एक छात्र भी बताया जा रहा है। पूछताछ के दौरान हाजीपुर निवासी मयंक कश्यप को संदिग्ध गतिविधियों के कारण पकड़ा गया, जिसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। वह कथित रूप से बायोमेट्रिक कर्मचारी बनकर परीक्षा केंद्र में घुसा था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, पावापुरी मेडिकल कॉलेज का छात्र रविशंकर इस गिरोह का मुख्य संचालक था, जबकि गया मेडिकल कॉलेज का छात्र अर्पित राज इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। खास बात यह है कि अर्पित का नाम पहले भी 2024 के चर्चित NEET पेपर लीक मामले में सामने आ चुका है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या NEET जैसी बड़ी परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित है? लाखों छात्र सालों की मेहनत के बाद इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन इस तरह के फर्जीवाड़े उनकी मेहनत और भरोसे दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।
फिलहाल पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि इस मामले में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।








