Samrat Cabinet Meeting: बिहार की राजनीतिक और प्रशासनिक दिशा तय करने वाली कैबिनेट बैठकों पर हमेशा लोगों की नजर रहती है। बुधवार, 27 मई को हुई सम्राट सरकार की कैबिनेट बैठक ने भी कुछ ऐसा ही माहौल बना दिया। इस बैठक में कुल 27 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनका सीधा असर राज्य के लाखों लोगों की जिंदगी पर पड़ने वाला है। खास बात यह रही कि फैसले सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, रोजगार, सिंचाई, न्याय व्यवस्था और बुनियादी ढांचे जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को छूते हैं।
इस बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ दोनों डिप्टी सीएम और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। फैसलों की लिस्ट लंबी है, लेकिन आम लोगों के नजरिए से देखें तो इसमें कई ऐसे निर्णय हैं जो भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
Samrat Cabinet Meeting: स्वास्थ्य से रोजगार तक: आम लोगों को राहत देने वाले फैसले
कैबिनेट के सबसे चर्चित फैसलों में से एक है कैशलेस चिकित्सा सुविधा का विस्तार। अब बिहार विधान मंडल के वर्तमान और पूर्व सदस्यों के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों, पेंशनधारियों और उनके आश्रितों को भी इस सुविधा का लाभ मिलेगा। इसका मतलब है कि इलाज के दौरान लोगों को तुरंत पैसे की चिंता नहीं करनी पड़ेगी, जो कि आम परिवारों के लिए बड़ी राहत की बात है।
वहीं दूसरी तरफ, सरकार ने रोजगार और कौशल विकास को लेकर भी बड़ा कदम उठाया है। युवा रोजगार एवं कौशल विभाग को मजबूत करने के लिए नए पदों का सृजन किया गया है। खास तौर पर दिव्यांगों के लिए योजनाएं, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर फोकस किया गया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब बिहार के युवा रोजगार के बेहतर अवसरों की तलाश में बाहर जाने को मजबूर होते हैं।
सरकार का यह प्रयास अगर सही तरीके से लागू होता है, तो आने वाले समय में राज्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
जमीन नीति, सिंचाई और इंफ्रास्ट्रक्चर: विकास की नई दिशा
कैबिनेट बैठक में बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026 को मंजूरी मिलना भी एक बड़ा फैसला माना जा रहा है। इस नई नीति के तहत सरकार जमीन खरीदते समय शहरी क्षेत्रों में बाजार मूल्य या सर्किल रेट (जो भी ज्यादा हो) का दोगुना और ग्रामीण क्षेत्रों में चार गुना तक भुगतान करेगी। साथ ही 10% अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी और स्टांप ड्यूटी से छूट मिलेगी।
इस फैसले का मकसद साफ है—सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण को आसान बनाना। अक्सर देखा जाता है कि कम मुआवजे की वजह से किसान अपनी जमीन देने में हिचकिचाते हैं। लेकिन अब बेहतर भुगतान मिलने से यह प्रक्रिया तेज हो सकती है।
इसके अलावा सिंचाई और जल प्रबंधन को लेकर भी बड़ा निवेश किया गया है। विश्व बैंक की मदद से चल रही परियोजनाओं के लिए 100 करोड़ से ज्यादा की राशि को मंजूरी दी गई है। इससे खास तौर पर मधुबनी और सुपौल जैसे बाढ़-प्रभावित जिलों में राहत मिलने की उम्मीद है। करीब 21,300 हेक्टेयर क्षेत्र को इससे फायदा होगा।
इसी के साथ, पंचायतों को दिए गए राजकीय नलकूपों की जिम्मेदारी फिर से लघु जल संसाधन विभाग को सौंपने का फैसला लिया गया है, ताकि उनकी देखरेख और संचालन बेहतर तरीके से हो सके।
न्याय व्यवस्था और सुरक्षा को भी मिला बढ़ावा
कैबिनेट बैठक में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। पटना हाईकोर्ट के जजों के लिए नए वाहनों की खरीद को मंजूरी दी गई है, जिसमें ईवी और हाइब्रिड वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह कदम न सिर्फ सुविधाओं को बेहतर बनाएगा, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी सकारात्मक माना जा रहा है।
इसके अलावा पूर्णिया, भागलपुर और गया में नए विशेष न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है। इससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी जमीन आवंटन के फैसले लिए गए हैं। शेखपुरा, गोपालगंज और बेगूसराय में विभिन्न सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन ट्रांसफर को मंजूरी मिली है, जिसमें आईबी कार्यालय और उपकारा निर्माण शामिल हैं।
क्यों अहम है यह कैबिनेट बैठक?
अगर पूरे फैसलों को एक साथ देखा जाए, तो यह साफ होता है कि सरकार ने विकास के कई मोर्चों पर एक साथ काम करने की रणनीति बनाई है। स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, न्याय और इंफ्रास्ट्रक्चर—हर क्षेत्र को छूने की कोशिश की गई है। हालांकि असली चुनौती इन फैसलों के क्रियान्वयन में होगी। बिहार जैसे बड़े राज्य में योजनाओं को जमीन पर उतारना आसान नहीं होता। लेकिन अगर इन फैसलों को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह राज्य के विकास की दिशा बदल सकते हैं।
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